मांगेराम आर्य समाज सेवी और आर्य विचारों वाले व्यक्ति हैं। मांगे राम का साधारण सा व्यक्तित्व, सादा खान पान, खादी का पहनावा और लगभग 42 साल से आर्य समाज दोघट यूनिट के माध्यम से सामाजिक कार्यों में जुटे हैं। शायद ही ऐसा कोई शासन-प्रशासन का विभागीय दफ्तर हो, जिस स्तर पर उनके विकास संबंधी कोई एजेंडा या सुझाव न लगा हो। इनमें से कुछ कार्य गति पाए और कुछ गतोन्मुख हैं।
मांगेराम आर्य का जन्म 10 जनवरी 1949 को कस्बा दोघट में चौधरी नाहर सिंह के घर में हुआ । अपनी मां का अकेला पुत्र था और अब उनके चार बेटे हैं। बड़ा बेटा दिल्ली पुलिस, दूसरा बेटा प्रोफेसर, तीसरा बेटा बीएसएफ और चौथा खेती में हैं। ये छोटे से किसान हैं। एक पुत्री जिसकी शादी शामली में हुई। प्रोफेसर की पत्नी भी हरियाणा सरकार में प्रोफेसर है। अर्सा पहले कस्बा दोघट में मुंशी मुख्त्यार सिंह, रामनिवास गुप्ता और मांगेराम आर्य कस्बे में वैदिक पुस्तकालय के माध्यम से आर्य समाज का प्रचार-प्रसार करते थे। 1974 में मुंशी मुख्त्यार सिंह के गुरूत्वाधीन मांगेराम आर्य ने 4 फरवरी 1974 को दोघट में आर्य समाज इकाई स्थापित की। कई उतार-चढ़ाव देखकर मांगे राम समाज सेवा में सदैव लीन रहे। इसी कारण उनको 19 सितंबर 2016 को दिल्ली में ठाकुर विक्रम सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट ने समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए नगदी व शॉल देकर सम्मानित किया । उन्होंने काफी समय पहले लखनऊ में प्रतिनिधि सभा के सामने लगने वाले मछली बाजार को 10 दिन तक अनशन करके हटवाया।
प्रयास से सफल होने वाले कुछ कार्य
मांगेराम आर्य ने मेरठ-छपरौली रूट पर रोडवेज बसें चलवाई। मृत्यु के बाद दोनों आंखों का दान किया। उन्होंने पूरा शरीर भी दान किया। इससे छात्रों को वैज्ञानिक ज्ञान का प्रशिक्षण मिलेगा। इसके अलावा पुसार गांव में सड़क पर पेट्रोल पंप व दोघट में गैस एजेंसी के लिए स्थान सर्जित कराना, दोघट डाकघर में स्पीड पोस्ट सेवा लागू कराया, दोघट की अंदर हदूद खतौनी गांव से पृथक कराई, दोघट में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सहारे से लाइट बिल कम कराए, दोघट में पशु चिकित्सालय भवन का बजट पास कराया और इसके लिए जगह दिलाई, दोघट में बिजलीघर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति कराने में सहयोग कर इनका कार्य पूर्ण कराया। सिंडिकेट बैंक दोघट का आधुनिकीकरण और एटीएम लगवाने का कार्य, सड़कों में गढ़ी मोड़ से बराल-छपरौली मार्ग की विशेष मरम्मत कराना, नांगल में बैंक शाखा खुलवाना, गरीब लोगों को मदद और अन्य बहुत सामूहिक कार्यों में सहयोग करने के साथ-साथ रमाला चीनी मिल की क्षमता बढ़वाने में भी प्रयासरत रहे।
कुछ कार्यों पर प्रयास जारी है-
छपरौली-पुसार-गढ़ी मार्ग को सात मीटर चौड़ा करवाने, दोघट में भारतीय स्टेट बैंक शाखा खुलवाने का प्रयास, दोघट-टीकरी विकास प्राधिकरण बनवाने में, दोघट में नवीन ब्लॉक को मंजूर करवाने, सिंडिकेट बैंक शाखा दोघट में एसी और नगदी की मशीन लगवाने, केंद्रीय सेवाओं में शहीद जवानों की विधवा के साथ मिलने वाले अनुदान में कुछ हिस्सा मां-बाप को भी दिलवाने, शामली से सुपर फास्ट रेल चलवाने, जनता वैदिक कालेज बड़ौत को कृषि विश्व विद्यालय बनवाने, ग्लैंडर्स फारसी बीमारी में मारे गए घोड़ों के स्वामियों को आर्थिक सहायता दिलवाने, नांगल गांव में प्राइमरी स्कूल खुलवाने, बड़ौत में मीरापुर रजबाहे, बाईपास मार्ग का निर्माण करवाने, चौगामा नहरों में पानी छुड़वाने, चौगामा में नलकूप के बिल कम कराने, दोघट से चित्तम खेड़ी तक सड़क निर्माण कराने, सरकार द्वारा घोषित नई रेल वे लाइन को दोघट-निरपुड़ा के माध्यम चौगामा प्याऊ से निकाले जाने आदि कार्यों के लिए प्रयासरत हैं।