प्रतिशोध में रहने वाला व्यक्ति रहता है दुखी - अरुण मुनि
बड़ौत (बागपत)।
अरुण मुनि ने कहा जहां प्रतिरोध की भावना नहीं होती, वही कल्याण होता है। जिसके मन में प्रतिशोध की भावना होती है, ऐसा व्यक्ति सदा दुखी रहता है। उसे जीवन में कभी शांति नहीं मिलती।
जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा इस धरती पर जहां हमने जन्म लिया है, सभी क्रियाएं निरंतर करने वाले व्यक्ति के मन में शंका रहती है, क्या मै वास्तव में धार्मिक हूं। ऐसा क्यों होता है। उन्होंने बताया जो मन की प्रसन्नता एवं पवित्रता के लिए धर्म करते है, यदि मन में प्रतिशोध की भावना नहीं होती, उसी का कल्याण होता है। अनेक दुखों को सहन करने पर भी यदि लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया तो फिर लाभ क्या। जब चित्त प्रसन्न होगा, तभी मोक्ष की प्राप्ति संभव है। इससे पूर्व अमन मुनि ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। इसमें जयप्रकाश जैन, डीके जैन, सोहन पाल, सुभाष चंद, हंस कुमार जैन, अभय जैन, दीपक जैन, शैल बाला, इंद्राणी, पूनम, मोनिका, मेमो देवी आदि रहे।