बागपत। शासन ने जनपदों से पलायन करने वालों का ब्योरा जुटने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए प्रमुख सचिव ने अफसरों को पत्र भेजकर पलायन करने वालों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस की टीम गोपनीय रूप से जांच में जुट गई है।
पूर्व की अखिलेश सरकार में शामली के कैराना के पलायन का मामला काफी सुर्खियों में रहा था। इसकी गूूंज दिल्ली तक पहुंची थी। पलायन के मामले को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की सरकार भी काफी गंभीरता से ले रही है। प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने पत्र भेजकर इस संबंध में जानकारी मांगी। पत्र के माध्यम से उन्होंने निर्देश दिए पता लगाया जाए जनपद में फरवरी 2017 तक किसने और क्यों पलायन किया। सांप्रदायिक तनाव के कारण पलायन किया या अपराधियों के डर से, भूमाफिया की दहशत या अन्य कोई रंजिश के कारण। ऐसे लोगों का नाम और पता स्पष्ट किया जाए। इसके लिए पत्र में एक कॉलम बना है। पत्र मिलते ही अफसर हरकत में आ गए। गोपनीय रूप से टीम इसका पता लगाने में लगी है।
मुजफ्फरनगर में सितंबर 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान बागपत में भी बड़े स्तर पर पलायन हुआ था। इतना ही नहीं मुजफ्फरनगर और शामली के काफी लोग बागपत शहर और निवाड़ा गांव में भी आकर बसे थे। जो अभी भी यहां पर रह रहे है।
जनपद में रंजिश में भी पलायन करने को लोग मजबूर हो रहे हैं। सिंघावली अहीर गांव के हेड मास्टर सत्यपाल शर्मा की रंजिश के चलते खिदौड़ा गांव के स्कूल में अप्रैल 2016 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले उनके बेटे की हत्या की गई थी। पुलिस सुरक्षा मिलने के बाद भी परिवार दहशत में है। गांव से पलायन किए हैं। इसके अलावा धनौरा सिल्वर नगर गांव के किसान देवी सिंह की पुलिस सुरक्षा में रंजिश के चलते हत्या की । इससे पहले उनके भाई की हत्या हो चुकी थी। पीड़ित परिवार दहशत में गांव छोड़ चुका है।