बागपत। नगर पालिका बागपत से सरकार को एक करोड़ 39 लाख रुपये की क्षति पहुंचाई गई है, जिसका जांच में खुलासा हुआ है। इसमें चेयरमैन राजूद्दीन को जिम्मेदार मानते हुए शासन से नोटिस जारी किया गया है। उनको 15 दिन में जवाब देना होगा और ऐसा नहीं करने पर उनके वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारी छिन सकते हैं।
सांसद के पूर्व प्रतिनिधि प्रदीप ठाकुर ने बागपत नगर पालिका में विकास कार्यों में घपलों से लेकर दुकान आवंटन और संपत्ति दर्ज करने में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाए गए थे कि नगर पालिका की दुकानों के किरायेदार मरने और किसी अन्य को देने पर दोबारा आवंटन किया जाना चाहिए था। लेकिन नगर पालिका ने ऐसी कोई प्रक्रिया किए बिना ही उनके नाम बदल दिए। इसके अलावा कोई सर्वे नहीं कराया गया और दस, पचास, सौ रुपये के स्टांप पर मकानों को नियम विरुद्ध नगर पालिका के संपत्ति कर रिकार्ड में दर्ज किया गया है। जबकि बैनामा के कागज के बिना संपत्ति को दर्ज नहीं किया जा सकता था। सर्वे रजिस्टर में अधिकारी तक के हस्ताक्षर नहीं है।
इस पूरे मामले की जांच कराई गई, जिसमें सामने आया कि इस तरह से करीब एक करोड़ 39 लाख रुपये की क्षति सरकार को पहुंचाई गई है। जिसके लिए चेयरमैन राजूद्दीन को जिम्मेदार मानते हुए नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने उनको नोटिस जारी किया है और उनसे 15 दिन में जवाब मांगा है।
चेयरमैन पर गड़बड़ी कराने के आरोप लगाए गए
प्रमुख सचिव ने जारी किए नोटिस में कहा है कि दुकानों का नामांतरण एक सामान्य आवेदन पत्र के आधार पर करने का आदेश दिया गया है। जबकि दुकानों में किरायेदारी समाप्त होने पर नगर पालिका नए किरायेदारी के लिए आवंटन की कार्रवाई के लिए दोबारा शुरुआत से करती है। सर्वे रजिस्टर में वार्ड वार सर्वेयर के हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही सक्षम अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं। आवेदकों की तरफ से कोई सही कागज नहीं दिया गया है तो आवेदन पत्र पर आवेदकों के हस्ताक्षर तक नहीं है। इस तरह फर्जीवाड़ा करके भवनों को दर्ज कर लिया गया है। 739 लोगों के नाम दर्ज किए गए, जबकि कागज केवल 39 के दिए गए। अन्य के कोई सही कागज नहीं दिए गए।
चेयरमैन के दबाव में सबकुछ किया
नगर पालिका कर्मचारियों के बयान भी जांच में लिए गए है। जिसमें कर्मचारियों ने कहा है कि नगर पालिका के संपत्ति कर रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए चेयरमैन ने अनैतिक रूप से दबाव बनाया था। नाम दर्ज करने से मना करने पर चेयरमैन ने कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कहकर धमकाया जाता था।
यह राजनीतिक शिकायत की गई थी। जिस तरह के आरोप लगाए गए है, वह पूरी तरह से गलत है। पालिका की आय बढ़ाने के लिए यह सबकुछ कराया गया था। इसमें भी सबकुछ नियम के अनुसार किया गया है। नगर पालिका में कोई गलत कार्य नहीं हुआ है। - राजूद्दीन, चेयरमैन नगर पालिका बागपत