दोघट (बागपत)। आजमपुर मुलसम और धनौरा गांव में चल रहे तीन दिवसीय यज्ञ में दूसरे दिन लोगों की भीड़ उमड़ी। आर्यजनों ने यज्ञ में आहुति दी।
धनौरा गांव में चल रहे अर्थ वेद पारायण यज्ञ में ब्रह्मा धर्म मुनि ने कहा कि यज्ञ से विश्व का कल्याण होता है। प्रकृति के पदार्थों को संयुक्त करता है एवं संतुलन बनाता है। यज्ञ पृथ्वी, भूकंप, वायु, तूफान, अग्नि, जल, ओलावृष्टि, बादल फटना आदि सभी पर नियंत्रण करने का विज्ञान है। वैदिक स्वरूप में परमात्मा की पूजा करने की श्रेष्ठतम विधि है। मनुष्य को इंद्रियों पर संयम करके दीर्घायु, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की सिद्धि होती है। इस मौके पर सत्यदेव आचार्य, विरेंद्र शास्त्री आदि रहे।
आजमपुर मुलसम गांव में चल रहे चतुर्वेद पारायण यज्ञ में योगाचार्य अरविंद शास्त्री ने कहा कि ब्रह्म यज्ञ मानव की बिखरी हुई वृत्तियों को एकत्रित करने का कार्य करता है। सुनील शास्त्री ने कहा कि यज्ञ एक पूर्ण वैज्ञानिक विधि होने के कारण इसमें जो आहुति दी जाती है उन्हें अग्नि की भेदक क्षमता के अनुसार उछाल प्राप्त होती है। आहुति में भेदक क्षमता आहुति प्रदान करने वाले व्यक्ति की शुचिता, पवित्रता, मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है। इस मौके पर मा. कृष्णपाल, महावीर, महेश, विशंभर, संदीप, गौरव चौधरी, संदीप, रामपाल, जितेंद्र आदि रहे।