दोघट (बागपत)। झूंडपुर गांव में स्वयंसेवी संस्था और जलनिगम की टीम ने घर-घर जाकर हैंडपंप व सबमर्सिबल पंपों के पानी की जांच की। पानी में नुकसानदायक भारी तत्व पाए गए हैं। इससे बीमारियां फैलने का खतरा है। टीम ने कई हैंडपंप चिन्हित किए हैं, इनका पानी पीने लायक नहीं है। इसके बाद ग्रामीणों में भय व्याप्त है।
सोमवार को स्वयं सेवी संस्था और जल निगम की टीम ने हिंडन नदी के किनारे बसे झूंडपुर गांव में पहुंचे। टीम ने घर-घर पहुंचकर हैंडपंप और सबमर्सिबल पंपों के पानी की जांच की। ग्राम प्रधान संजीव कुमार ने बताया कि पानी में भारी तत्व अधिक पाए गए हैं। पेयजल को पीना खतरनाक हो सकता है। गांव में हिंडन नदी में प्रवाहित दूषित पानी के लिए भूजल दूषित हो चुका है। टीम ने ग्रामीणों से फार्म भी भरवाए और उन्हें रसीद दी। ग्रामीणों को हैंडपंप और सबमर्सिबल पंप के पानी का इस्तेमाल न करने की सलाह दी। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। गांव में पेयजल संकट पैदा हो गया है। शासन-प्रशासन ने शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं कराई। ग्रामीणों ने कहा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
पानी की व्यवस्था नहीं, फिर उखाड़े जाएंगे प्रदूषित जल देने वाले हैंडपंप
कृष्णा और हिंडन नदी किनारे कई गांव में हैंडपंप और नलकूप दे रहे प्रदूषित पानी
एनजीटी के आदेश पर पहले भी उखाड़े जा चुके हैं 480 हैंडपंप
दाहा (बागपत)। मरकरी की अधिकता वाला पानी दे रहे हैंडपंपों और नलकूपों को एनजीटी ने उखाड़ने के निर्देश दिए हैं। जिले में प्रदूषित पानी पीने से कैंसर जैसी बीमारी कई गांव में फैल चुकी है। पिछले वर्ष भी 480 हैंडपंप उखाड़े थे, लेकिन अभी तक इन गांवों में पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों ने कहा पेयजल की व्यवस्था भी होनी चाहिए। एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने प्रत्येक जिले में अपनी टीम भेजकर पानी के नमूने लिए और जांच कराई। इसमें मरकरी की अधिकता वाले पानी की पुष्टि हुई, इसके बाद यह फैसला लिया प्रदूषित पानी दे रहे हैंडपंपों को उखाड़ा जाए। चौगामा क्षेत्र के ग्रामीणों ने कहा पिछले साल भी हैंडपंप उखाड़े, लेकिन अभी तक पेयजल की व्यवस्था नहीं की। कई गांवों में पेयजल योजना लटकी है।
अभिशाप बन गई कृष्णा
दाहा (बागपत)। चार दशक पहले तक चौगामा क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कृष्णा अब अभिशाप बन गई है। प्रदूषित जल बीमारियां परोस रहा है। अकेले दाहा, निरपुडा, भड़ल और गांगनौली में ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक है। कृष्णा के उद्गम स्थल से जल स्रोत सूख चुका है, अब इसमें केवल फैक्ट्रियों का गंदा पानी बहता है। एक सौ फुट गहराई तक भूजल प्रभावित है। हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में मरकरी, नाइट्रेट, फ्लोराइड, फास्फोरस और केडियम की मात्रा अधिक है।
बागपत से ऐसे बहती है कृष्णा
कृष्णा नदी बागपत में टीकरी और असारा गांव के बीच से एंट्री करती है। हिम्मतपुर, बूड़पुर, सूझती, इब्राहिमपुर माजरा, गांगनौली, कंडेरा, नांगल, इदरीशपुर, बामनौली, मांगरौली, रहतना, दादरी से होते बरनावा में हिंडन और कृष्णा एक हो जाती हैं। नोएडा में जाकर दोनों यमुना में गिरती हैं।
किससे क्या बीमारी?
लेड : इसकी अधिकता से गुर्दों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एनीमिया, मुंह में जल जलन, मरोड़, उल्टी, पेट में दर्द, लकवा, मानसिक रोग व खून की कमी की संभावना भी रहती है।
केडिमियम: गुर्दों की बीमारी, दिमागी बीमारियां, शरीर में ऐंठन, तनाव, मिचली, उल्टी, पेचिस और कैंसर आदि बीमारियां होती हैं।
क्रोमियम : फेफड़ों का कैंसर, त्वचा एवं नाक की श्लेषिभिक झिल्ली में अल्सर पैदा होने की संभावना रहती है।