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विश्व मधुमेह दिवस पर विशेष........

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बड़ौत (बागपत)।
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साइलेंट किलर यानी डायबिटीज की बीमारी लगातार बढ़ रही है। आलम यह है वर्तमान समय में डायबिटीज रोग से हर पांच में एक व्यक्ति इस रोग से ग्रसित है। खानपान की खराबी, वर्तमान शैली में शारीरिक श्रम की कमी के कारण पिछले दशकों में दुनिया के हर देश मेें मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ी है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक श्रम और योग से मधुमेह जैसे रोग का आसानी से निदान हो जाता है।
आज विश्व भर मेें सर फेडरिक बैंटिग के जन्मदिवस पर मधुमेह यानी डायबिटीज दिवस मनाया जा रहा है। इन्होंने ही इस बीमारी की खोज की थी। प्रतिवर्ष 14 नवंबर को मधुमेह से प्रभावित बढ़ते रोगियों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से उक्त दिवस मनाया जाता है। 1991 से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 14 नवंबर का दिन चयन कर विश्व में 140 देश इस दिन को मनाते हैं। 2007 से संयुक्त राष्ट्र ने मधुमेह दिवस पर मधुमेह के लिए एकजुटता के रूप में मनाने के लिए नीला छल्ला प्रतीक चिह्न के रूप में चयन किया। जो निरंतरता एवं नीला रंग आकाश का सहयोग और व्यापकता का प्रतीक है।
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इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है और रक्त की कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग नहीं कर पाती। यदि यह ग्लूकोज का बढ़ा हुआ लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंग प्रत्यंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। इसलिए डायबिटीज को समझना बहुत जरूरी है। दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर और योगाचार्य डॉ. महेश कुमार मुछाल बताते है कि भारत में 340 से 350 लाख लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं। जो विश्व रिकार्ड के अनुसार 17 प्रतिशत नगरीय क्षेत्र और 2.5 ग्रामीण क्षेत्र के लोग मधुमेह जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया नियमित पैदल घूमना, शारीरिक व्यायाम एवं योगासन एवं प्राणायम से मधुमेह जैसे रोगी को लाभ मिलता है। कपाल भांति प्राणायम विशेष रूप से डायबिटीज को दूर करने में उपयोगी है। उन्होंने बताया कि इस प्राणायम में श्वास को केवल छोड़ना है। छोड़ने पर पेट अंदर जाता है। इसके अलावा मंडूकासन, गोमुखासन, योग मुद्रासन, पादागुष्ठ, नासा स्पर्शा सन, हला सन, पाद पश्चिोत्तानासन, वक्रासन, सूर्य नमस्कार आदि का अभ्यास कर मधुमेह रोग से निजात मिल सकती है।
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