बिनौली (बागपत)। बरनावा में हिंडन नदी किनारे चल रहे उत्खनन कार्य में प्राचीन मानव सभ्यता के प्रमाण मिले हैं। 67 साल पहले हस्तिनापुर में उत्खनन जैसे रिंग वैल यहां भी मिले हैं। मनके, आभूषण और मृदभांड मिले, इससे करीब तीन हजार साल पुरानी मानव सभ्यता के संकेत अब तक मिल चुके हैं। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने उत्खनन स्थल का दौरा किया। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल ने डीएम को उत्खनन में मिली चीजें दिखाईं। पॉटरी यार्ड का भी भ्रमण कराया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग उत्खनन शाखा द्वितीय और भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला की संयुक्त टीम बरनावा में हिंडन नदी के किनारे उत्खनन कार्य कर रही है। पुरातत्व संस्थान के निदेशक डॉ. एसके मंजुल के निर्देशन में उत्खनन चल रहा है। बृहस्पतिवार को डीएम ऋषिरेंद्र कुमार, डॉ. एसके मंजुल, डॉ. अरविन मंजुल और शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने उत्खनन स्थल का दौरा किया। डॉ. एसके मंजुल ने डीएम को अब तक उत्खनन में मिली सफलता के विषय में बताया। इस दौरान डीएम को प्राचीन मनके, आभूषण, मृद भांड के अवशेष दिखाए । प्राचीन महत्व की चीजें मिलने से यहां करीब चार हजार साल पुरानी मानव बस्ती और सभ्यता के संकेत हैं। वर्ष 1950 में हस्तिनापुर में जिस तरह के रिंग वैल खुदाई में मिले थे, वैसे ही रिंग वैल यहां भी मिलने शुरू हुए हैं। इससे हस्तिनापुर और बरनावा का एक ही काल माना जा रहा है। इससे जाहिर है कि यहां महाभारत कालीन सभ्यता रही है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी आधिकारिक तौर पर यहां मिल रही पुरातत्व महत्व की चीजों की पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
इतिहास से यह है जुड़ाव
बिनौली। बरनावा का पूरा क्षेत्र ही नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर, शामली में भी महाभारत काल के अवशेष हैं। इसकी पुष्टि इस वजह से भी होती है, क्योंकि यह पूरा एरिया कुुरुक्षेत्र और हस्तिानापुर के बीच पड़ता है। बरनावा का यह टीला हिंडन और कृष्णा नदी से घिरा हुआ है। इसके पास ही शेखपुरा में दोनों नदियां एक हो जाती हैं।