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महाराजा रणजीत सिंह ने बढ़ाया था देश का मान

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बागपत। जाट भवन में महाराजा रणजीत सिंह का जन्म दिवस मनाया। इस मौके पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए । वक्ताओं ने उनकी वीर गाथा को बताया और उनके पद चिह्न पर चलने का आह्वान किया।
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सोमवार को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर स्थित जाट भवन में जिला जाट सभा ने महाराजा रणजीत सिंह की जयंती मनाई। इस मौके पर जगपाल सिंह ने उनकी बहादुरी के बारे में बताया। कहा कि उनके शासन में सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार किया जाता था, जो सर्वधर्म समभाव के प्रतीक थे। शीशपाल तोमर ने कहा कि हजारों वर्ष से देश पश्चिमी सीमाओं से विदेशी आक्रमण को झेल रहा। रक्षात्मक प्रयत्न करते रहे और पराजय मिल रही थी। रणजीत सिंह चंद्रगुप्त मौर्य के बाद पहले पराक्रमी राजा थे। जिन्होंने देश की सीमाओं को लांघ कर विदेशी राज्य पर आक्रमण किया और अफगानिस्तान के शासक शाह सुजा को हराकर कोहनूर हीरे को लेकर आए। इस विजय में उनके सेनापति हरि सिंह नलवा का विशेष योगदान रहा। जीत पर महाराज ने 33-33 मन सोना स्वर्ण मंदिर अमृतसर, काशी विश्वनाथ मंदिर और कोनार्क के सूर्य मंदिर को दान किया। इसमें सभा के अध्यक्ष जगपाल सिंह, महासचिव नगेंद्र सिंह, जयवीर सिंह, प्रधानाचार्य वीरेंद्र पंवार, सतीश, तेजपाल सिंह, महावीर सिंह राणा, ओमपाल सिंह, विश्वदीप चौधरी, इंद्रपाल सिंह, सोहनवीर तोमर, महिपाल सिंह मौजूद रहे।
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