नोटिस मिलते ही बीडीओ ने उगला राज
बागपत। मनरेगा घोटाले की आए दिन नई-नई परतें खुल रही है। सेवानिवृत्त बीडीओ ने पूर्व तकनीकी सहायक को इसका सूत्रधार बताया। सीडीओ से पूर्व तकनीकी सहायक को जांच में शामिल करने की मांग की।
मनरेगा के पूर्व कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) हरीश गहलौत ने गांवों में सोलर लाइट और ह्यूम पाइप लगाने के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला किया। इसका भुगतान अपनी पत्नी और भाई की फर्म को कराया। गांवों में कार्य हुए नहीं फिर भी इन सामानों का भुगतान किया। घोटाला सिद्ध हुआ तो एपीओ सामान समेटकर गायब गया। इसके बाद अफसरों ने सभी दस्तावेज और ब्लॉकों के कर्मचारियों से पूछताछ की ।
पिलाना ब्लॉक के सेवानिवृत्त बीडीओ मुंशी लाल को भी नोटिस जारी किया। इसके बाद उन्होंने सीडीओ को पत्र भेजकर पूर्व तकनीकी सहायक भूपेंद्र को इसका सूत्रधार बताया। उन्होंने कहा पूर्व एपीओ का हरीश गहलौत सबसे करीबी था। उसके बिना गड़बड़ होना संभव नहीं था। वित्त वर्ष 2015-16 में उन्होंने ब्लॉक का चार्ज लिया था। इसके बाद चुनाव में व्यस्त हो गया था। जो भी कार्य योजना बनाई जाती थी वह ग्राम पंचायतों के माध्यम से ही बनती थी। सामग्री का अंश कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा ही दर्ज किया जाता था। घोटाले से उसका कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने सीडीओ को पत्र के माध्यम से जांच में भूपेंद्र की संलिप्तता को शामिल करके दोबारा जांच कराने की मांग की।