बागपत। मासूम की रेप के बाद हत्या के मामले में अदालत ने इंसाफ किया। अनिल कश्यप को फांसी की सजा सुनाए जाते ही बच्ची के ताऊ की आंखें भर आई। वह बोले कि छह साल से उनका परिवार तड़प रहा था। दरिंदे को फांसी पर लटका देखकर ही उन्हें सुकून मिलेगा। मां ने कहा कि इस दिन के लिए ही वह कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। उन्हें इंसाफ का भरोसा था। दरिंदे को फांसी टूटने का इंतजार है।
अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी (महिला उत्पीड़न)- प्रथम शक्ति पुत्र तोमर ने फांसी की सजा सुनाई। चंद मिनट बाद ही आदेश कोर्ट के बाहर खड़े बच्ची के पिता और मामी को जानकारी मिली। बच्ची के ताऊ की आंखें भर आई। वह कहने लगा कि अदालत ने इंसाफ किया है। दरिंदे को फांसी पर लटका देखने के लिए उनका पूरा परिवार इसी दिन का इंतजार कर रहा था। परिवार के युवक ने फैसले की जानकारी मोबाइल के जरिए हिम्मतपुर सूजती में बच्ची की मां को दी। बेटी की हत्या के बाद से बीमार चल रही बच्ची की मां ने इतना कहा कि दरिंदा फांसी पर कब लटकेगा। इसके बाद वह बेहोश हो गई। अदालत पहुंची मृतका की मामी ने कहा कि मासूम के साथ ऐसी हरकत करने वाले को फांसी पर ही लटकाया जाना चाहिए था, अदालत ने इंसाफ कर दिया।
दुष्कर्म में उम्रकैद, हत्या में फांसी
धारा 302 में मृत्युदंड। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
धारा 376 में उम्रकैद और 30 हजार रुपये का अर्थदंड।
धारा 201 में सात वर्ष का कारावास, 10 हजार रुपये का अर्थदंड।
इनकी गवाही से लगी फांसी पर मुहर
वादी हिम्मतपुर सूजती निवासी मृतका का ताऊ।
बागपत कोतवाली में तैनात हेड कांस्टेबल कच्छिद्र सिंह।
छह साल की मासूम मृतका की मां।
नया गांव हमीदाबाद का रहने वाला प्रत्यक्षदर्शी संजय कुमार।
मासूम का पोस्टमार्टम करने वाले बागपत के डॉ. रवि प्रकाश।
बागपत कोतवाली प्रभारी आरके सिंह, जो घटनास्थल पर पहुंचे थे।
दुष्कर्म और हत्या की वारदात के विवेचक आशाराम।
सोमेंद्र ढाका ने नि:शुल्क लड़ी इंसाफ की जंग
बागपत। नया गांव हमीदाबाद में 12 दिसंबर 2012 को छह साल की बच्ची का शव मिलने के बाद अधिवक्ताओं में भी आक्रोश की लहर दौड़ गई थी। आम आदमी पार्टी के संयोजक और अधिवक्ता सोमेेंद्र ढाका का कहना है कि उन्होंने नि:शुल्क इंसाफ की लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट तक भी वह परिवार के साथ रहेंगे। अधिवक्ताओं ने 13 दिसंबर 2012 को बार संघ कार्यालय में शोक सभा का आयोजन भी किया था।
छह साल की बच्ची के केस में कब क्या हुआ?
आठ दिसंबर 2012 को बच्ची परिवार के साथ हिम्मतपुर सूजती से नया गांव हमीदाबाद पहुंची।
नौ दिसंबर 2012 को दोपहर करीब तीन बजे अचानक बच्ची लापता हो गई।
10 दिसंबर 2012 को ग्रामीणों ने हंगामा प्रदर्शन किया, बरामदगी की मांग की।
11 दिसंबर 2012 को ग्रामीणों ने मेरठ रोड जाम किया, जनप्रतिनिधि पहुंचे।
12 दिसंबर 2012 को गांव में ही ईंख के खेत में बच्ची की लाश मिली।
24 दिसंबर 2012 को पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।
23 मार्च 2018 को अभियुक्त अनिल कश्यप पर दोष सिद्ध हुआ।
29 मार्च 2018 को अभियुक्त अनिल कश्यप को फांसी सजा सुनाई गई।
मिर्धानपुरा केस में सुनाई थी फांसी की सजा
बागपत। मासूम बच्ची प्रकरण से पहले अगस्त 2012 में ऑनर किलिंग के मामले में दो अभियुक्तों को बागपत की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। इस सजा को बाद में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था।
...सजा हुई, लेकिन लंबी होगी लड़ाई
बागपत। मासूम बच्ची के हत्यारे को अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है। लेकिन अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना है। सजा को अनुमोदन के लिए हाईकोर्ट भेजा जाएगा। बचाव पक्ष के पास भी हाईकोर्ट जाने का विकल्प खुला है। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी अगर सजा पर मुहर लगा दी तो बचाव पक्ष के पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल करने का विकल्प रहेगा।