आठ घंटे हाईवे पर रेंगते रहे वाहन
बागपत। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के गड्ढ़े फिर मुसीबत बन गए। गौरीपुर मोड पर जलभराव हो गया। यहां आठ तक वाहन रेंगकर चलते रहे। यात्रियों को मुश्किलें झेलनी पड़ी। हरियाणा बॉर्डर तक महिलाओं और बच्चों ने पैदल ही सफर तय किया। कई वाहन भी पलटने से बाल-बाल बचे।
बृहस्पतिवार रात बारिश के कारण गौरीपुर मोड़ पर जलभराव हो गया। इसके चलते टी-प्वाइंट पर भारी वाहन जाम में फंस गए। रात में करीब तीन घंटे तक जाम की स्थिति रही। पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर जाम खुलवाया। शुक्रवार को दिन निकलते ही फिर से जाम के हालात बन गए। सुबह छह से दोपहर 11 बजे तक वाहन रेंगकर चलते रहे। कई वाहन यहां पलटने से बाल-बाल बचे। जाम में फंसे यात्रियों ने पैदल ही सफर किया। सोनीपत जाने वाले यात्री यहां से पैदल ही निवाड़ा बॉर्डर तक पहुंचे। बच्चों और महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ी। पुलिस को शहर के राष्ट्रवंदना चौक से बड़ौत जाने वाले वाहनों को मेरठ रोड से डायवर्ट करना पड़ा। दोपहर बाद व्यवस्था दुुरुस्त हो सकी।
जाम ने खड़ी कर दी परेशानी
बागपत। जाम के कारण दिल्ली, सोनीपत और बड़ौत जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सोनीपत नौकरी करने वाले संजीव शर्मा ने बताया कि उसे 10 बजे ऑफिस पहुंचना था, लेकिन जाम के कारण वह दो घंटे लेट हुआ। बड़ौत से दिल्ली जाने वाले शिक्षक अश्वनी ने बताया कि जाम से आए दिन परेशानी होती है।
स्कूली वाहन भी जाम में फंसे
जाम में स्कूली वाहन में भी फंस गए। बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर कई शिक्षण संस्थाएं, जिनकी बसें बच्चों को लेने के लिए देहात में जाती है। सोनीपत के स्कूलों की बसें भी बागपत आती है। जाम की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा।
ठेकेदार कंपनी पर विधायक ने दर्ज कराया था मुकदमा
दिल्ली-यमुनौत्री हाइवे पर गड्ढों के कारण होने वाले हादसों के चलते बसपा विधायक ने ठेकेदार कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। गड्ढ़ों का मामला विधानसभा में भी उठाया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
सरूरपुर कलां में गुफा वाले मंदिर के निकट वर्ष 2016 में हाइवे पर युवक की मौत हो गई थी। बड़ौत के तत्कालीन बसपा विधायक लोकेश दीक्षित ने इस मामले में अन्य हादसों का जिक्र करते हुए बागपत कोतवाली में ठेकेदार कंपनी को हादसों का जिम्मेदार बताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। यह मामला चर्चाओं में रहा था। विधायक ने बताया कि इसके अलावा हाइवे पर होने वाले हादसों में जानमाल के नुकसान के मसले को विधानसभा में भी उठाया गया था।
क्या-क्या हुए काम?
बागपत। तीस मार्च 2012 को निर्माण कार्य शुरू होने के बाद बागपत जिले में करीब सात हजार पेड़ काटे गए। सिसाना और सरूरपुर कलां जैसे गांवों में लोगों के मकानों पर बुलडोजर चला। जिले की सीमा में किसी भी पुलिया का निर्माण नहीं हुआ। कईं जगह निर्माण शुरू हुआ, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया।