बागपत। चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की प्रयोगशाला में पशुओं की गल घोंटू बीमारी और मुर्गी को लगाने वाली रानीखेत वैक्सीन की जांच हो सकेगी। केंद्र सरकार ने संस्थान को दोनों टीकों की जांच के लिए अधिकृत किया। संस्थान को दोनों टीकों की जांच की अनुमति मिलना बड़ी उपलब्धि है।
केंद्र सरकार के पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन विभाग की ओर से बागपत में चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान संचालित हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने बताया कि संस्थान से पशु चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम हासिल होंगे। पिछले दिनों उन्होंने कृषि मंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर संस्थान के टीकों की जांच में आ रही बाधा के विषय में बातचीत की। केंद्र सरकार ने गलघोंटू के टीके हैमोरहैजिक सेप्टिसीमिया और मुर्गियों की बीमारी में प्रयोग होने वाले रानीखेत टीके की जांच की अनुमति प्रदान कर दी। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया। पशु चिकित्सा के क्षेत्र में दोनों टीके महत्वपूर्ण हैं। संस्थान की प्रयोगशाला में दोनों की जांच के बाद ही वैक्सीन को हरी झंडी दी जाएगी। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रवीण मलिक ने बताया कि अन्य कई टीकों की जांच की अनुमति के लिए भी संस्थान की ओर से प्रयास किया जा रहा है।
15 साल पहले रखी गई थी नींव
बागपत। चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की नींव वर्ष 2003 में रखी। इसका उद्घाटन वर्ष 2010 में हुआ। टीकों की जांच में स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुमति में देरी हो रही थी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कई माह पहले संस्थान का दौरा किया तो उनके संज्ञान में यह मामला आया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से वार्ता कर समाधान निकलवाया।
तीन बार की टीम ने दौरा
बागपत। टीके की जांच की अनुमति से पहले केंद्र सरकार की टीम ने तीन बार बागपत का दौरा किया। प्रयोगशाला की व्यवस्था देखी। इसके बाद ही अनुमति दी गई।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि बागपत के लिए यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। संस्थान को टीकों की जांच मिलनी शुरू हो गई है। पूरे क्षेत्र केा ही नहीं बल्कि देशभर को इससे लाभ होगा।