बागपत। प्रवासी पक्षियों से बर्ड फ्लू फैलने का खतरा है। सूबे के पशुपालन विभाग ने इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया है। पशु चिकित्सा विभाग की टीम यमुना किनारे पहुंचने वाले प्रवासी पक्षियों की बीट (मल) के नमूने लेगी। इनको जांच के लिए बरेली के आरवीआरआई (इंडिया वेटरनिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट) भेजेगी। वन विभाग के अधिकारियों से भी सहयोग लिया जाएगा।
प्रवासी पक्षी बर्ड फ्लू के लिए सबसे बड़ा खतरा होते हैं। सर्दी का मौसम शुरू होते ही यमुना, पोखर या तालाबों पर वर्तमान समय में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। ऐसे में किनारों पर प्रवासी पक्षियों की संक्रमित बीट, लारवा गिरने से अन्य पक्षियों के इनकी चपेट में आने की संभावना रहती है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि बर्ड फ्लू से बचाव के लिए मुर्गी फार्म से भी नमूने लिए जा रहे हैं। जल्द अब प्रवासी पक्षियों के नमूने इकट्ठा किए जाएंगे। यमुना और पोखरों के पास जहां ये पक्षी रहते हैं, वहां पर एक टीम भेजी जाएंगी। बीट के नमूने लेंगे।
172 पक्षियों नमूने जांच के लिए भेजे
सीवीओ डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक में चल रहे मुर्गी फार्मों से 172 नमूने एकत्र किए हैं। इनको बरेली जांच के लिए भेजा है। अभी और भी नमूने लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सर्दी की शुरूआत और मार्च के अंत तक इस रोग का प्रकोप रहता है। इसके बाद परेशानी की बात नहीं रहती है।
जागरूकता है जरूरी
डिप्टी सीवीओ डॉ. लोकेश अग्रवाल ने बताया कि बर्ड फ्लू इसके लिए उपाय के साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी है। सर्दी के मौसम में पक्षियों से दूरी बना लेनी चाहिए। व्यक्ति इसकी चपेट में जल्दी आ जाते है। छह माह या एक वर्ष में व्यक्ति की मौत तक हो जाती है।
पक्षियों में बर्ड फ्लू के लक्षण
नीली पड़ी हुई मुर्गी की कलगी और वॉटल, मुर्गी के पंजों में धब्बे, मुर्गी के चेहरे, सिर और गर्दन में सूजन, आंखों में रिसाव होना, कमजोरी, पंख गिरना, हरकत में कमी, आहार कम लेना और अंडे कम देना
कैसे होता है रोग
एक पक्षी से दूसरे पक्षी में
दूषित पानी व गंदगी से
संक्रमित पक्षियों के आहार, मल, मूत्र, पंखा, उपकरण से फैल्ता है।
रोग से बचाव और तरीके
बीमार मुर्गी के संपर्क में आने से बचे, अनावश्यक लोगों को बाड़ा में प्रवेश न दें, पक्षियों को अन्य पक्षियों के संपर्क में न आने दे, विभन्न प्रजातियों को एक ही बाड़ा में न रखे, पक्षियों का भोजन एवं पानी रोजाना बदले और बर्तनों की नियमित सफाई करें, नये पक्षियों को कम से कम 30 दिन तक स्वस्थ पक्षियों से दूर रखे, संक्रमित मुर्गी को मार कर उनका सुरक्षित निपटान करें, अपने पक्षियों की हर असामान्य बीमारी, अथवा मौत की सूचना तुरंत पास के पशु चिकित्साधिकारी को तत्काल दें।