बागपत। हाइवे जानलेवा बन गया है, लेकिन सिस्टम को फिक्र नहीं है। काठा में मिनी बस पलटी, जिसमें तीस से अधिक यात्री घायल हो गए। गड्ढ़ों की वजह से हादसा हुआ। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर यह पहला मामला नहीं है। पिछले छह माह की बात करें तो 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल है।
पिछले विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा रहा हाइवे कब बनेगा, इस सवाल का जवाब फाइलों में बंद है। गौरीपुर मोड के टी-प्वाइंट से गुजरना आफत को न्यौता देना है। हरियाणा से बागपत और मेरठ को जोडने वाले इस टी-प्वाइंट पर गड्ढों की वजह से हर वक्त जाम रहता है। यहां चार लोगों की मौत अब तक गड्ढों की वजह से हो चुकी है। जिले के प्रभारी मंत्री एसपी सिंह बघेल यहां जाम में फंसे तो उन्होंने डीएम को इस टी प्वाइंट का निर्माण कराने के निर्देश दिए। फटाफट इसकी फाइल तैयार कराई गई, लेकिन आदेश अभी तक फाइल में ही बंद है। सरूरपुर कलां से लेकर बागपत तक इस हाइवे से गुजरना मुश्किलों भरा है। आए दिन हादसे होते हैं, लेकिन सिस्टम नहीं जागता। लोगों की जान जाती है, हंगामा होता है, लेकिन फिर सब पहले जैसा। चार गांव के लोगों की जिंदगी नासूर बन गई है। इसमें सिसाना, सरूरपुर, निवाड़ा और गौरीपुर शामिल है। धूल के चलते इन गांवों में बीमारियां फैल रही है।
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जैसा भी है यह मार्ग बनवा दो
भाजपा सांसद डॉ सत्यपाल सिंह का कहना है कि यूपी सरकार से एनओसी मिल चुकी है, अब इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बनाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी बागपत दौरे पर यही भरोसा दिलाया था, लेकिन मार्ग कब बनेगा, कब बजट आएगा, यह कोई नहीं जानता। अब लोग कहने लगे हैं कि जैसा भी बने, बस इस मार्ग को बनवा दो।