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जयंत चौधरी ने किया ट्वीट, सरकार राम भरोसे

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जयंत ने किया ट्वीट, सरकार राम भरोसे
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बागपत। सूबे के प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को सिलेबस की पूरी किताबें नहीं मिलने पर रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने ट्वीट किया है। जयंत चौधरी ने लिखा है कि सरकार राम भरोसे हैं। बच्चों के इम्तिहान सिर पर हैं और दाखिले को पांच महीने हो चुके हैं। लेकिन अब तक किताबें नहीं मिली हैं।
मंगलवार को जयंत चौधरी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि योगी सरकार की लापरवाही की शायद कोई हद नहीं। प्राथमिक स्कूलों में आधार रचना में सुधार को लेकर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। इम्तिहान सिर पे हैं, पांच महीने दाखिले को हो चुके हैं, लेकिन सूबे के एक करोड़ 54 लाख स्कूली बच्चों को अब तक न किताबें मिली हैं और ना जूते, ना बस्ते। सरकार राम भरोसे है। रालोद नेता के ट्वीट के बाद इस पर पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाएं आई है।
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परिषदीय स्कूलों के सत्र के बीच में बदला कोर्स
बागपत। परिषदीय स्कूलों में अभी तक बच्चे पुराने सिलेबस और पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन अब सिलेबस बदल दिया गया है। नई सप्लाई की किताबों में पाठ्यक्रम बदला हुआ है। इससे शिक्षकों के बीच संशय का माहौल है। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र नैन का कहना है कि कोर्स बदले जाने से दोबारा से बच्चों को पढ़ाई करानी होगी। जूनियर हाईस्कूल में गणित बदल गया है। प्राइमरी में हमारा परिवेश, अंग्रेजी, रैनबो और संस्कृत में बदलाव किया गया है। अभी तक स्कूलों में पूरी किताबें भी नहीं मिली है। बीएसए बागपत चंद्रकेश यादव ने भी परिषदीय स्कूलों के कोर्स में बदलाव की पुष्टि की है।
बागपत में भी नहीं पहुंचा पूरा कोर्स
बागपत। प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को अभी तक पूरा कोर्स नहीं मिला है। बच्चों को एक या दो किताबें ही दी जा सकी है। बीएसए चंद्रकेश यादव का कहना है कि जिले से डिमांड भेजी जा चुकी है, जल्द ही पूरा कोर्स उपलब्ध हो जाएगा। किताबें मिलते ही बच्चों के बीच वितरित करा दी जाएगी।
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अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी नहीं पहुंची किताबें
बागपत। अंग्रेजी माध्यम से संचालित किए गए 47 स्कूलों में भी अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं। इससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों से बच्चों को बेहतर शिक्षा का विकल्प देने की कोशिश की गई थी। लेकिन किताबें नहीं पहुंचने के कारण पढ़ाई अधर में लटकी है। इन स्कूलों में 5227 बच्चों ने पंजीकरण कराया था। यह बच्चे बगैर किताबों के पढ़ाई कर रहे हैं।
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