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सियासी स्ट्रोक या सियासत से दूर होंगे अजित सिंह

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बागपत। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने उम्र का हवाला देकर चुनाव नहीं लड़ने की बात कहकर सियासत में हलचल मचा दी है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे अजित सिंह के बयान को सियासी से दूर होने के बजाए सियासी स्ट्रोक ही माना जा रहा है। अजित सिंह के बयान के बाद कार्यकर्ताओं ने उनका मान-मनोव्वल किया। यह भी कहा कि मुजफ्फरनगर से नहीं, बल्कि बागपत से ही चुनाव लड़ाया जाएगा। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद से ही इस बात की चर्चाएं तेज हो गई कि अजित सिंह इस बार बागपत से चुनाव नहीं लड़ेंगे।
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असल में मंगलवार को चौधरी अजित सिंह के दौरे का मकसद कार्यकर्ताओं का मन टटोलना था। रालोद नेताओं को जिले के महत्वपूर्ण संगठनों और लोगों को जन संवाद कार्यक्रम में लाने की जिम्मेदारी सौंपी। चर्चा चुनाव लड़ने की छिड़ी तो चौधरी अजित सिंह ने कहा कि यह तय नहीं किया। उम्र का हवाला देकर यह भी कह दिया कि जरूरी नहीं है कि वह चुनाव ही लड़ें। सियासत के गलियारों में चौधरी अजित सिंह के बयान को सियासी स्ट्रोक से ही जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का मन टटोलने के लिए यह बात कही, इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उनका मान-मनौव्वल भी किया। यह भी संभावना है कि चुनाव लड़ने के बजाए वह गठबंधन के किंग मेकर लोगों में शुमार हो जाएं। बगैर चुनाव लड़े भी वह सक्रिय राजनीति में रह सकते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बागपत से जयंत चौधरी को चुनाव लड़ाया जाना चाहिए। चौधरी अजित सिंह ने कहा कि अभी कुछ तय नहीं है। रालोद जिलाध्यक्ष सुखबीर गठीना कहते हैं कि चौधरी अजित सिंह सक्रिय राजनीति में हैं, वह चुनाव भी लड़ेंगे।
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