बड़ौत (बागपत)।
नगर के स्कूल और कॉलेजों में सोमवार को डॉ. रविंद्रनाथ टैगोर का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बांधा। मेधावियों को ट्राफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज मेें आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य विजयानंद, प्रधानाचार्या बीना आर्य और देवेंद्र ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। प्रधानाचार्य विजयानंद ने स्कूली बच्चों को डॉ. रविन्द्रनाथ टैगोर के सिद्धांतों को अपनाकर उनके पदचिन्हों पर चलने की अपील की। इसके बाद आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर आने वाली ज्योति, द्वितीय स्थान पर आने वाली रूबी और तृतीय स्थान पर आने वाले अंकित जैन को प्रधानाचार्य ने ट्राफी व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। संचालन देवेंद्र ने किया।
जेपी पब्लिक स्कूल में डायरेक्टर गौरव शर्मा, निर्देशिका शरण शर्मा और अभिषेक शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। स्कूली बच्चों ने डॉ. रविंद्रनाथ टैगोर के जन्मोत्सव पर रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। डायरेक्टर गौरव शर्मा ने बच्चों को बताया कि रविंद्र नाथ टैगोर ने ही राष्ट्र गान लिखा। हमें उनसे सीख लेनी चाहिए। इस अवसर पर मेधावियों को सम्मानित किया। चौधरी केहर सिंह दिव्य पब्लिक स्कूल में संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आरपीएस तोमर, सचिव डॉ. मनीष तोमर और प्रधानाचार्य जेपी सिंह ने बच्चों के साथ डॉ. रविंद्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की । सेंट आरवी कान्वेंट स्कूल में डायरेक्टर अनुराग जैन, चारू जैन, प्रधानाचार्य पंकज शर्मा और शिक्षा निर्देशक निर्दोष शर्मा ने रविंद्रनाथ की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। डायरेक्टर अनुराग जैन ने बताया कि डॉ. रविंद्र नाथ टैगोर विश्वविख्यात कवि, प्रसिद्ध साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एक मात्र नोबेल पुरस्कार विजेता है। इसमें शिवांश, तनु, खुशी, नीलाक्षी, अक्षि, दिशा, आदित्य, प्राची, रिया, रिहान, तमन्ना, प्रदीप शर्मा, दीपक शर्मा, इशान, कृष्णकुमार, विनीत तोमर, वैभव जैन, अक्षय, शिवानी, मनीषा, अंशु, पूनम, ममता, सविता, रीना, रचना, अंजू, सीमा, इशिका आदि रहे। माउंट लिटरा स्कूल में चेयरमैन हंस कुमार जैन, बिजेंद्र जैन, हिमांशु जैन, ऋषभ जैन और मीडिया प्रभारी ओपी शर्मा ने कहा डॉ. रविंद्र नाथ टैगोर ने भारत देश के लिए राष्ट्रगान जन-गण-मन और बांग्लादेश का आमार-सोनार बांग्ला की रचनाएं लिखी। उन्होंने बच्चों को सच्चाई के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।