दोघट (बागपत) । आठ बीघा जमीन की गलत चकबंदी करने से आहत किसान के आत्महत्या करने बाद पीड़ित परिवार का अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। मृतक किसान की पत्नी और बेटी ने कलक्ट्रेट में डीएम से मुलाकात कर पीड़ा बताई। डीएम ने कहा डीडीसी को जांच सौंप दी गई है, अगर किसी भी स्तर से गड़बड़ी हुई है तो कार्रवाई होगी।
किसान कृष्णपाल की मौत के बाद उसका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। मृतक किसान की पत्नी सुमन, बेटी भावना (15), बेटे महेश (13), प्रशांत (11) और बेटी प्रियांशी (08) ने दूसरे दिन भी अन्न और जल ग्रहण नहीं किया। उन्होंने कहा प्रशासन प्रकरण में ढुलमुल रवैया अपनाए हैं। उधर, कलक्ट्रेट में डीएम भवानी सिंह खंगारौत से मिलने पहुंची किसान की पत्नी सुमन और बेटी प्रियांशी ने चकबंदी और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर प्रकरण में आरोप लगाए। प्रार्थना पत्र में आरोपी अधिकारियों के नामों का खुलासा कर नामजद मुकदमा दर्ज कराने की मांग भी की । डीएम ने कहा प्रकरण की जांच डीडीसी चकबंदी/ एडीएम (वित्त एवं राजस्व) लोकपाल सिंह को दी गई है। हर स्तर पर जांच कराई जा रही है, जिसकी भी गलती होगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इंसाफ तक ग्रहण नहीं करेंगे अन्न-जल
बागपत। मृतक किसान की पत्नी सुमन ने कहा घर के मुखिया की मौत के जिम्मेदार चकबंदी अधिकारी है। उनके खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। चकबंदी के कारण वह कर्ज बंद हो गए हैं। उनका संपूर्ण कर्ज माफ होना चाहिए। उनकी आठ बीघा जमीन एक ही जगह मिलनी चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती, न तो अन्न का एक दाना ग्रहण करेंगे और न ही पानी की एक बूंद तक पीएंगे।
अब तक गांव नहीं पहुंचे चकबंदी अधिकारी
बागपत। डीएम भवानी सिंह ने प्रकरण की जांच के लिए एसओसी (चकबंदी) अजय उपाध्याय को बामनौली गांव भेजा । बुधवार को वह गांव में तनाव को देखकर गांव के बाहर से ही वापस लौट गए। एसओसी ने कहा गांव में तनाव था, इसलिए वह नहीं जा सके। उधर, अब इस मामले की जांच डीडीसी चकबंदी को दी गई है।
इंसाफ के लिए हर दर पर भटका था कृष्णपाल
बागपत। मृतक किसान की पत्नी सुमन देवी ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सुमन का दावा है कि कानूनगो ने 25 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन नहीं देने पर उनके चक को दूसरे पक्ष की सुनीता पत्नी रविंद्र को दे दिया । आरोप लगाया कि कानूनगो ने फसल भी सुनीता पक्ष को ही कटवाई। इसके बाद कृष्णपाल ने चकबंदी अधिकारी बड़ौत को प्रार्थना पत्र दिया। आरोप है कि कानूनगो ने उससे दोबारा 50 हजार रुपये की मांग की और दोबारा चक पहले की तरह देने के लिए कहा। इस पर उसे 45 हजार रुपये दिए गए, लेकिन कोई काम नहीं किया गया। इसके बाद कृष्णपाल चकबंदी अधिकारी के पास गए। आरोप है कि उन्होंने अपने पेशकार के माध्यम से 40 हजार रुपये की मांग की। नहीं देने पर वाद खारिज कर दिया । इसके बाद बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के कार्यालय में वाद दायर किया। उनके पेशकार ने 60 हजार रुपये की मांग की। इस पर 50 हजार रुपये दिए भी गए। आरोप है कि मई 2017 में उसकी फसल काटकर बाहर डाल दिया गया। सुमन देवी के दावों पर डीएम भवानी सिंह खंगारौत का कहना है कि प्रकरण की जांच डीडीसी को दी गई है। जिन अधिकारियों पर आरोप लगे हैं, उनकी जांच कराई जाएगी।