बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि छल-कपट का महल आखिर एक दिन ढह जाता है। अधिक दिन तक नहीं ठहर सकता। जीवन की सरिता यद िपाप की ओर मुड़ गई तो ये नदियां काली-काली बदबूदार हो जाती है।
जैन स्थानक मंडी में आयोजित धर्मसभा में जैन संत अरुण मुनि ने कहा कि यदि नदियों को सुगंधित नहीं कर सकते तो दुर्गंध भी न होने दो। जीवन को संवारना है तो पाप कर्म से बचो। माया चारी करने वाला यह चाहता है कि तेरी चालाकी किसी को पता न चले। इसलिए वह तरह-तरह से झूठ बोलकर अपनी कमजोरी को छिपाता है। हर व्यक्ति को पहचान पत्र होता है। आप जिन शासन में श्रावक तभी माने जाओगे जब जैन धर्म का पहचान पत्र आप के पास होगा। आज तो भाई को भाई का विश्वास नहीं है। यह सब बातें समाज में क्यों आई। क्योंकि हमारे अंदर सरलता नहीं आ पाई। भगवान महावीर ने पैसा कमाने की मनाई नहीं की थी। उनका कहना था कि पैसा कमाओ पाप मत कमाओ। धर्मसभा में आगम मुनि ने भी विचार रखे। धर्मसभा में वीरचंद, अजय जैन, मनोज लाल, मुकेश, सुधीर जैन, कालू जैन, मोहित जैन, हंस कुमार, दीपक जैन, कैलाश जैन, इंदू आदि शामिल थे।