बड़ौत (बागपत)।
जैन संत अरुण मुनि ने कहा तप का मतलब भूखे मरना नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करना है। जब इंसान की सभी इच्छाएं मर जाती है। तभी वह भगवान बनता है।
जैन स्थानक शहर में आयोजित धर्मसभा में उन्होंने कहा आज पर्युषण महापर्व का दूसरा दिन है। सदियों से श्रवण संस्कृति इसकी आराधना करती आ रही है। उन्होंने कहा भादों का महीना पूर्ण रूप से तप और आराधना करने का है। तप का मतलब भूखा मरना नहीं। उन्होंने कहा यह ऐसा पर्व है जो मनुष्य को पूर्ण रूप से उसके मन, शरीर, समाज व संपूर्ण, सृष्टि को प्रभावित कर देता है। आठ दिन में आत्मा, शुद्धि आत्मा समर्पण के लिए शपथ ली जाती है। यह बात सत्य है तप करने से मनुष्य का शरीर ध्वस्त होता है, कमजोरी आती है, लेकिन आत्मा का उतना ही उत्थान होता है और मन शंात होता है। इस पर्व का सीधा कनेक्शन आत्मा से होता है। धर्मसभा में कमलेश जैन ने तप की आराधना में 34वां दिन गीता एवं पूनम के निरंतर तप की आराधना करने पर उनका आभार जताया। इसमें अमित राय जैन, मनीष जैन, नरेश कालू, दिनेश, सुभाष, मोहित, रोहित, हंस कुमार जैन, कालू जैन, दीपक जैन आदि रहे।
जैन साध्वी ने किए प्रवचन
अमीनगर सराय। जैन साध्वी अभिप्सा जी ने जैन कहा जीवन में क्षमाशील एवं समता शील रहने वाले ही सच्चे धर्मात्मा बन सकते हैं। समय रहते धर्माचरण कर मनुष्य जन्म सार्थक कर लेने वाले ही समझदार है। इससे पूर्व पर्यूषण पर्व के साथ महामंत्र ण्मोकार का अखंड जाप्यानुष्ठान शुरू हो गया। मूलचंद जैन, सुशील, सतेंद्र, इंद्रपाल वर्मा, वीरसैन जेन, अनिल, घनश्याम मित्तल, विचित्र, रविंद्र, इंद्रसैन गुप्ता, रमेश गर्ग, अशोक जैन आदि रहे।