शहर के मुख्य चौक चलिसवां पर निकाले मातमी जुलूस में घोड़ा दुलदुल।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। अंजुमन अंसारे हुसैन के तत्वाधान में चेहल्लुम का जुलूस शुक्रवार को शहर में निकाला गया। मदरसा बाग मीर पेटू से शुरू होकर जुलूस कदीमी रास्तों से होता हुआ करबला मैदान पहुंचा। जुलूस में स्थानीय अंजुमनों के साथ बाहर से आए अंजुमनों ने नौहा, मातम व सीनाजनी पेश कर करबला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।
चेहल्लुम जुलूस से पहले मदरसा बाग मीर पेटू पर मजलिस हुई जिसे इमाम-ए-जुमा व मदरसा बाबुल इल्म मुबारकपुर के प्रधानाचार्या मौलाना मजाहिर हुसैन ने खिता किया। इसके बाद अलम, दुलदुल की शबीह निकाली गई। जुलूस पुरानी कोतवाली होते हुए चौक पहुंचा जहां जीशान अली आजमी ने तकरीर की। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी सोये हुए जमीरों को जगाना था ताकि जालिम व जुल्म को बेनकाब किया जाए। इसके बाद जुलूस पुरानी सब्जीमंडी पहुंचा जहां मुंबई से आए शाहिद रिजवी ने तकरीर की। उन्होंने कहा कि इस्लाम में आतंक व आतंकवाद जैसी किसी भी अमानवीय विचारधारा का कोई स्थान नहीं है। इमामबाड़ा अबू तालिब कटरा पर काश्मीर से आए मौलाना गुलाम रसूल ने तकरीर की। यहां इमाम हुसैन के शहादत का वाकिया सुन लोगों की आंखें छलक पड़ीं। कुंदीगढ़ मुहल्ला स्थित इमामबाड़ा अंसारे हुसैनी पर जुलूस के पहुंचने पर ताबूत इमाम हुसैन, दुलदुल व इमाम के छह माह के शहीद अली असगर का झूला व अलम निकाला गया। अजादारों ने फूल माला चढ़ाकर मन्नत मांगी। जुलूस कर्बला मैदान पहुंचा जहां हर कोई शहीदों के गम में डूबा नजर आया। अजादार हुसैन चुन्ना ने शुक्रिया अदा किया।
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सीनाजनी व जंजीरी मातम देखने को उमड़ी भीड़
चेहल्लुम के जुलूस में शामिल अंजुमन पूरे रास्ते सीनाजनी, जंजीरी व नौहा मातम करते चल रहे थे। जगह-जगह मुस्लिम महिलाएं भी बच्चों के साथ सीनाजनी और जंजीरी मातम देखने के लिए जुटी थी।
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कई बाहरी अंजुमन भी हुए शामिल
जुलूस में अंजुमन जीनतुल अजा आलमपुर बाराबंकी, अंजुमन फिरदौसिया सीवान गोपालपुर बिहार, मुहिब्बाने हुसैनी कदीम समंदरपुर, अंसारे हुसैनी कदीम मुबारकपुर आदि शामिल रहे।
शहर के मुख्य चौक चलिसवां पर निकाले जुलूस में मातम करते शिया समुदाय के लोग।- फोटो : AZAMGARH