मई दिवस पर सभा करते मजदूर दिवस यादगार समिति के लोग। श्रोत- स्वयं
आजमगढ़। मजदूर दिवस यादगार समिति के नेतृत्व में शुक्रवार को मजदूर, किसान संगठनों और यूनियनों ने सुबह 10 बजे नरौली प्राइवेट बस अड्डे से कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला गया। इस दौरान मजदूर एकता जिंदाबाद, दुनिया के मजदूरों एक हो, पूंजीवाद मुर्दाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद और चार लेबर कोड वापस लो जैसे नारे लगाए गए।
इसके बाद जुलूस कलेक्ट्रेट पहुंचकर कामरेड बैजनाथ की अध्यक्षता में सभा हुई। इसमें मजदूरों की समस्याओं से संबंधित मांगपत्र राष्ट्रपति के नाम जिला अधिकारी के माध्यम से भेजा गया।गिरीश चंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि वर्ष 1886 में अमेरिका के शिकागो सहित अन्य शहरों में आठ घंटे कार्यदिवस की मांग को लेकर हुए ऐतिहासिक आंदोलन के बाद मजदूरों को यह अधिकार मिला। इसके बाद 1889 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है और उनकी जायज मांगों को दबाया जा रहा है।
उन्होंने हाल के दिनों में विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों के उत्पीड़न की घटनाओं का विरोध करते हुए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।