आजमगढ़। सेवायोजन कार्यालय अब केवल बेरोजगारों के पंजीकरण का दफ्तर भर रह गया है। विभाग ऐसे युवकों को भी रोजगार दिलाने का दावा कर रहा है, जो शाहजहांपुर और मथुरा जनपद के रहने वाले हैं। नियुक्ति के फर्जी आंकड़ों के सहारे विभाग अपनी ‘बेरोजगार दफ्तर’ की छवि से उबरने का प्रयास कर रहा है। यह हम नहीं कह रहे हैं यह कहना है सेवायोजन कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई नौकरी पाने वाले युवाओं की सूची में शामिल अभ्यर्थियों का।
बनारसी साड़ियों और ब्लैक पाटरी जैसी दस्तकारी के लिए पहचाने जाने वाले आजमगढ़ जिले के युवक रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। पिछले छह सालों में अब तक आठ लाख से अधिक युवा सेवायोजन कार्यालय में रोजगार के लिए गुहार लगा चुके हैं लेकिन रोजगार गिनती के नौजवानों को ही मिला है। जिन्हें रोजगार दिलाने का दावा कार्यालय कर रहा है, उनमें भी गड़बड़ियां हैं। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 91 हजार 381 बेरोजगार युवाओं ने पंजीकरण कराया। जून से अब तक कार्यालय ने 11 रोजगार मेलों का आयोजन किया। इन मेलों के जरिए 713 लोगों को रोजगार दिलाने का दावा किया जा रहा रहा है। सेवायोजन कार्यालय ने इनमें से 12 लोगों की एक सूची उपलब्ध कराई, जिसकी पड़ताल में पता चला कि वे आज भी बेरोजगार हैं या दूसरे शहरों के रहने वाले हैं। सूची में शामिल कुछ युवक-युवतियां मथुरा व बुलंदशहर के रहने वाले हैं।
बैठे हैं इंतजार में, नहीं मिला रोजगार
मथुरा की रहने वाली हूं। एक दिन लखनऊ से नौकरी के लिए काल आई थी। दिन में 12 बजे फोन आया और शाम को बुलाया गया था। लिहाजा जा न सकी। यह बताया शालिनी ने। मगर ऐसे तमाम नौजवान हैं, जिन्हें रोजगार देेने की बात कही गई थी लेकिन आज तक सूचना नहीं आई। आजमगढ़ के सर्वेश व प्रतीक ने बताया कि सेवायोजन विभाग से पता चला कि कंपनियों को डाटा भेजा गया है, उनके यहां फोन आएगा। वे आज तक उस फोन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। धनंजय ने कहा कि मैं सूरत में काम कर रहा हूं। सेवायोजन विभाग का रोजगार देने का दावा गलत है। आजमगढ़ के फिरोजाबाद के अमरजीत ने बताया कि सेवायोजन विभाग ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में रोजगार देने की बात कही थी लेकिन नौकरी नहीं मिली।
हर साल हजारों युवा यहां पंजीकरण कराते हैं। उन्हें रोजगार देने के लिए मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई थी। जिसमें युवाओं को नई-नई कंपनियां बुलाती हैं। कंपनियों से चयनित अभ्यर्थियों की हमें जो सूची हमें मिली है उसे ही हम अपने आंकड़ों में फीड करते हैं।
- अनुजा यादव, सहायक सेवायोजन अधिकारी, आजमगढ़।