अहरौला। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य पर सोमवार को नसबंदी शिविर का आयोजन था। जिसके लिए सुबह 9 बजे से ही महिलाएं पहुंची हुई थी। देर शाम तक ठंड में महिलाएं आपरेशन शुरू होने का इंतजार करती रह गई लेकिन सर्जन के नहीं पहुंचने के चलते उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ा।
नसबंदी शिविर के आयोजन की जानकारी पर सोमवार की सुबह काफी संख्या में महिलाएं पहुंची हुई थी। नसबंदी के लिए कुल 63 महिलाओं ने अपना पंजीकरण कराया था। सुबह 9 बजे से शाम छह बजे तक नसबंदी कराने वाली महिलाएं ठंड के इस मौसम में सीएचसी पर पहुंच कर सर्जन के आने का इंतजार करती रही लेकिन सर्जन नहीं पहुंचे, जिसके चलते नसबंदी पंजीकरण कराने वाली महिलाओं को बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। इस बाबत सीएचसी प्रभारी डॉ. योगेश गौतम ने बताया कि मुख्यालय के निर्देश पर नसबंदी शिविर आयोजित था। सीएचसी पर कोई सर्जन तैनात नहीं है, जिसके चलते इस शिविर के लिए मुख्यालय से ही सर्जन बुलाया गया था। देर शाम तक सर्जन के न आने से नसबंदी के लिए उपस्थित महिलाओं को लौटना पड़ा। हैरानी की बात तो ये है कि अस्पताल प्रशासन ने आपरेशन के लिए 63 महिलाओं का पंजीकरण किया था और यह अस्पताल मात्र 30 बेड का ही है, इसमें भी मात्र आठ से दस बेड ही मौजूद है। ऐसे में यदि आपरेशन होता भी तो महिलाओं को बेड कहा उपलब्ध कराया जाता, इस मुद्दे पर सीएचसी प्रशासन चुप्पी साध लिया।
जिस डॉक्टर को नसबंदी आपरेशन करना था वह पहले पवई पर गये थे। देर शाम तक डॉक्टर अहरौला सीएचसी पहुंचे और आपरेशन शुरू भी करा दिया गया, छह बजे तक आपरेशन शुरू न होने की बात गलत है, फिर भी मैं पता करता हूं।
- डॉ. एके मिश्रा, सीएमओ, आजमगढ़।