आजमगढ़। कड़ाके की ठंड ने रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों की मुसीबत बढ़ा दी है। अधिकतर बसों की खिड़कियों में रबर नहीं है। ब्रेेकलगने पर शीशे अपने आप खुल जाते हैं। वहीं, कुछ बसों के शीशे ही गायब है। इससे यात्री ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा करने को मजबूर हो जाते हैं। रोडवेज के अपने दावों को लेकर यात्रियों का कहना है कि उनके दावे अपनी जगह ठीक, लेकिन हम तो ठंड से ठिठुर-ठिठुर कर यात्रा करने को विवश हैं।
जबकि इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से ‘परिवर्तन की ओर’ नाम से अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में निगम के अधिकारियों को बसों को गोद लेकर देखरेख करने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन स्थिति जस की तस है। जिले में करीब 403 बसें संचालित होती हैं। इसमें से परिवहन निगम की 371 व अनुबंधित 32 बसें हैं। प्रतिदिन चार हजार से अधिक यात्री आवागमन करते हैं, लेकिन बसों में ठंड से बचने के इंतजाम नहीं हैं। खिड़कियों में रबर नहीं होने से शीशे अपने आप खुल जाते हैं, तो कुछ के शीशे जाम हो गए हैं। अधिकतर खिड़कियों में क्लिप नहीं हैं। इन्हें बंद करने में परेशानी होती है।
खिड़कियों में लगे शीशा खराब हो जाते हैं तो उसे बनवा दिया जाता है। बस में जो भी कमी रहती है, उसे ठीक कराया जाता है। बसों को गोद लेकर उनकी देखरेख की जा रही है। - केशरी नंदन चौधरी, आरएम आजमगढ़।