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Azamgarh News: वन जाते समय श्रीराम ने तमसा तट पर गुजारी थी रात

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आजमगढ़। आजमगढ़ जिले में तमसा नदी के किनारे स्थित रामघाट पर प्रभु श्रीराम ने वन जाते समय एक रात गुजारी थी। कहा जाता है कि इसी स्थल रति क्रीड़ा में लीन क्रौंच पक्षियों पर बहेलिया का हमला देख महर्षि वाल्मीकि द्रवित हो गए थे। इसके बाद उन्होंने भगवान ब्रह्मा की प्रेरणा से रामायण जैसे कालजयी महाकाव्य की रचना की। कहा जाता है कि माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास जाते समय प्रभु श्रीराम ने एक रात तमसा के तट पर गुजारी थी। यहां से वह भारद्वाज ऋषि के आश्रम प्रयागराज पहुंचे थे। उनके आदेश के बाद चित्रकूट के लिए रवाना हुए थे। इन तथ्यों का जिक्र महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी मिलता है। माना जाता है कि तमसा किनारे का यह स्थान शहर के बीच रामघाट स्थित बड़ा मंदिर है। तमसा नदी पहले मंदिर के पास से होकर बहती थी। इसके भी साक्ष्य उपलब्ध हैं। बताया जाता है कि शहर में बाढ़ आने की वजह से अंग्रेजी शासन काल में नदी की धारा को मोड़ा गया था। इसके बाद से नदी शहर के किनारे से बहने लगी। नदी का रास्ता बदलने के बाद यहां कई निर्माण हो गए हैं। वहीं, कुछ लोगाें ने मंदिर की जमीन पर भी कब्जा कर लिया है।
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