फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Azamgarh News: जहां बिकती थी बंदूक और गोलियां अब बिक रही घड़ियां व गिफ्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
आजमगढ़। जनपद में लाइसेंसी शस्त्र की दुकानें धीरे-धीरे बंद हो रहीं हैं। कभी जनपद में 12 दुकानें संचालित होती थीं लेकिन आज महज पांच दुकानें ही संचालित हो रही हैं। हाल यह हो गया है कि जिन दुकानों पर कभी चमचाती बंदूकें बिकती थीं अब उसकी जगह घड़ी और गिफ्ट आइटमें बिक रहीं हैं।
विज्ञापन

कई ऐसी भी दुकानें हैं जिनके एक हिस्से में बंदूक और कारतूस रख गए हैं, जबकि बाकी में अन्य आइटम सजा रखे हैं। पहले यह दुकानें मुख्य व्यवसाय थीं, अब लोगों ने इसे साइड बिजनेस के रूप में करना शुरू कर दिया है।
एक समय था जब शस्त्रों का लोगों में काफी क्रेज था। शादी-विवाह में लोग फायरिंग करना अपनी शान समझते थे। जिसके कारण लगन का सीजन शुरू होते ही शस्त्र लाइसेंसों की दुकानों पर लोगों की लाइन कारतूस खरीदने के लिए लगती थी। लोगों के लाइसेंस पर कारतूस खरीदने का कोटा खत्म हो जाता था तो लोग दूसरे के लाइसेंस पर कारतूस खरीदते थे। लेकिन, शादियों में हर्ष फायरिंग जरूर करते थे। समय बदला और नए नियम बन गए, जिसने हर्ष फायरिंग के साथ असलहों के शौकीनों पर लगाम लगाई। धीरे-धीरे कर जिन शस्त्र लाइसेंस की दुकानों की गिनती बड़े ब्रांड के रूप में होती थी वहां अब घड़ी और गिफ्ट आइटमों की दुकानें खुल गई हैं।
विज्ञापन

जिले में वर्तमान में कुल 17542 शस्त्र लाइसेंसधारी हैं। इन लोगों द्वारा जनपद में स्थापित 12 दुकानों से कारतूस की खरीद की जाती थी। कारतूस खरीद को लेकर बदले नियमों ने इस कारोबार पर पूरी तरह से लगाम लगा दिया है। जिससे दुकानदारों को खर्च निकालना भी भारी पड़ने लगा है। जिसके कारण इनमें से सात दुकानें बंद हो गईं, उनमें अब दूसरे सामान बिकने लगे हैं।

वर्तमान मात्र पांच दुकानें ही संचालित हो रही हैं। प्रकाश आर्म्स स्टोर मुख्य चौक की दुकान में अब घड़ियों के साथ ही इलेक्ट्रानिक्स सामानों की बिक्री हो रही है। गड़बड़ी में काजी गन हाउस बंद हो चुका है। शिब्ली आर्म्स स्टोर्स चौक की दुकान में कपड़े आदि की दुकान खुल चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें