1. भूख व वजन में अच्छी खासी गिरावट आना।
2. नींद में खलल, सो पाने में असमर्थ या जल्द सोना।
3. चिड़चिड़ेपन में बढ़ोतरी या आम गतिविधियां में अंतर आना।
4. अधिक अपराधबोध या हीनता महसूस होना।
5. परेशानी या अपने को उलझन में महसूस करना।
6. बार-बार मृत्यु या आत्महत्या का ख्याल आना।
1. सेहतमंद खाना खाएं और नियमित व्यायाम करें।
2. नकारात्मक विचार वाले लोगों से बचने का प्रयास करें।
3. शरीर को पूरा आराम दें और नींद भर सोंए।
4. एकांकी न बने, दोस्तों और परिवार के बीच ज्यादा समय बिताएं।
5. लक्षण पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर से मिले।
6. पुरानी बातों को याद न करें।
20 जून- जिला मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन परिसर में 20 वर्षीया युवती करिश्मा ने दुपट्टे के सहारे फांसी लगा ली।
19 जून- रानी की सराय थाना क्षेत्र स्थित कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित आवास में 24 वर्षीय युवक ने फांसी लगा कर जान दी।
18 जून- गंभीरपुर थाना क्षेत्र के रानीपुर रजमो गांव निवासीनी 18 वर्षीया आरती सिंह पुत्री घनश्याम सिंह ने फांसी लगाई।
16 जून- बरदह के सरायमोहन गांव की 16 वर्षीया पूजा और गंभीरपुर थाना क्षेत्र के नौका पुरवा दयालपुर गांव निवासी मिलिंद ने की खुदकुुशी।
15 जून- मुबारकपुर थाना क्षेत्र के कस्बा सराय गांव की 20 वर्षीया नाजनीन पुत्री दरवेश जोगी ने फांसी लगा कर आत्महत्या किया।
14 जून- अतरौलिया थाना क्षेत्र के बढ़या गांव की आरती गुप्ता पत्नी शिवकुमार ने साड़ी के सहारे फांसी लगा कर जान दे दी।
13 जून- मेंहनगर थाना क्षेत्र के गहुनी गांव की 23 वर्षीया सोनी देवी और रौनापार थाना क्षेत्र के बाजार गोसाई निवासी 32 वर्षीय अमित ने दी जान।
12 जून- दीदारगंज थाना क्षेत्र के गोसड़ी गांव निवासी 40 वर्षीय दुर्गेश पांडेय पुत्र त्रिपुरारी ने फांसी लगा कर आत्महत्या किया।
1. मौत या हिंसा की बात करना।
2. मूड में तेजी से बदलाव का होना।
3. मरने या मारने की इच्छा के बारे में बात करना।
4. उन हथियारों या चीजो तक पहुंचा, जिससे आत्महत्या की जा सकती है।
5. फंसे हुए, निराशजनक, बेकार या जैसे दूसरे पर बोझ महसूस कर रहे है के बारे में बात करना।
6. दोस्त, परिवार या सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना।
7. समय से अधिक या कम सोना।
8. शांत या अशांत मनोदशा, विशेष रुप से उत्तेजित होना।
9. आवेगी अथवा जोखिम भरा व्यवहार करना।
मानसिक अवसाद से ग्रसित होकर आत्महत्या की सोचने वाले निश्चित तौर पर अपने करीबी को आत्महत्या करने के पूर्व ही इसके संकेत दे देते है। यदि इन संकेतों को हम समझ ले और आत्महत्या करने वाले के अशांत मन को शांत कर दे तो निश्चित तौर पर वह व्यक्ति आत्महत्या नहीं करेगा। यदि संकेत पकड़ में आ जा रहे है तो उससे बात करें और उसके मन के अशांत होने के बारे में जानकारी करें। निश्चित तौर पर आत्महत्या करने की सोचने वाला व्यक्ति अपना पूरा जीवन जीना चाहता है, यही कारण है कि वह आत्महत्या के पहले अपनों के बीच इसका संकेत देते रहते है। -डॉ. विंध्य प्रकाश सिंह, मनोचिकित्सक, लाइफ लाइन हॉस्पिट एंड रिसर्च सेंटर, आजमगढ़।