अमिलो। मुबारकपुर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में बीसी सखी बुनकर योजना मंदी की दौर में बुनकरों के लिए वरदान साबित होती नजर आ रही है। बीसी सखी साड़ी की मजदूरी बुनकरों के खाते में भेज दी जाती है। इससे बुनकरों में आशा की एक नई किरण जगी है। मुबारकपुर क्षेत्र में सैकड़ों परिवार के लिए बुनकारी रोजी रोटी का सहारा बनी है। रेशमी साड़ी उद्योग यहां की धरोहर कहा जाता है जो अपने अस्तित्व को बचाने का संघर्ष कर रहा है। ऐसे समय में बीसी सखी योजना संजीवनी बूटी का काम रही है। आजादी के बाद से पहली बार इस तरह की योजना लागू की गयी है जिसका लाभ सीधा बुनकर के खाते में भेजकर बुनकरों को रोजगार से जोड़ा गया है। धीरे-धीरे बुनकर इस योजना से जुड़ रहा है। लगभग साढ़े छह सौ परिवार इस बीसी सखी योजना से जीवन यापन कर रहा है। इस योजना में बुनकर को कच्चा माल ताना बाना, कोन, जरी आदि मुफ्त में मिलता है। केवल करघा पर साड़ी को बुनकर बुनकरों को देना है। मजदूरी सात सौ पचास रुपये उसके खाते मे भुगतान कर दी जाती है। इसके लिए छह से लेकर दस करघा पर एक मास्टर ट्रेनर होता है जो बुनकर मजदूर के करघा की देखभाल करता है। इस प्रकार यहां कुल 60 ट्रेनर भी तैनात हैं। उन्हें प्रति साड़ी एक सौ रुपए का भी भुगतान मिलता है। इस प्रकार बेरोजगार की समस्या को दूर करने के लिए बीसी सखी योजना को और विभागों से जोड़ने की दरकार है।