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दो सेमी घटा तमसा का जलस्तर, फिर भी हालात भयावह

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शहर के नरौली क्षेत्र में पनी के के बीच से घर जाती बच्चियां। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। 24 घंटे स्थिर रहने के बाद तमसा के जलस्तर में घटाव शुरू हो गया है। इसके बाद भी तमसा के तटवर्ती इलाकों में आवास बना कर रहने वाले लोगों में भय का माहौल व्याप्त है। लोग इस बात को लेकर ज्यादा दहशत में है कि यदि मौसम विभाग के कहने के अनुरूप अभी तीन-चार दिन और बरसात हुई तो स्थिति काफी खराब हो जायेगी और तमसा का जलस्तर शहर की सडक़ों पर बहने लगेगा। शहर से लेकर ग्रामीणांचल तक तमसा किनारे स्थित बसे लोग अब भी दहशत में जी रहे है।
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तीन-चार दिनों तक बरसात बंद होने के बाद शुक्रवार की सुबह एक बार मौसम ने पुन: करवट लिया और कुछ देर ही सही लेकिन ठीक-ठाक बरसात हुई। वहीं गुरुवार की शाम चार बजे से शुक्रवार की सुबह आठ बजे तक तमसा का जलस्तर 73.47 मीटर पर स्थित रहा। शुक्रवार की शाम चार बजे तमसा के जलस्तर में दो सेमी का मामूली घटाव दर्ज किया गया। शाम चार बजे तमसा का जलसतर 73.45 मीटर पहुंच गया था। बाढख़ंड के जेई अवनीश कुमार के अनुसार यदि बरसात नहीं हुई तो तमसा के जलस्तर में अब धीरे-धीरे घटाव ही दर्ज होगा। लेकिन यदि मौसम विभाग की चेतावनी के अनुरूप बरसात हो गई तो जलस्तर में वृद्धि भीा हो सकती है। जिले के लिए जीवनदायिनी कहीं जाने वाली तमसा ने वर्ष 2005 में विकराल रुप धारण किया था। 14 साल बार एक बार फिर शहर वासियों को तमसा का रौद्र रूप देखना पड़ रहा है। जलस्तर में मामूली कमी जरूर हुई और बढ़ोतरी पर लगाम भी लगा है, इसके बाद भी इसकी भयावहता कहीं से भी कम नहीं हुई है। तमसा के तटीय इलाकों में आवास बना कर रह रहे लोगों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई है। घरों में पानी भरा है तो आसपास पानी ही पानी नजर आ रहा है। वहीं ग्रामीणांचल में भी तमसा द्वारा पेटी छोड़ कर खेतो में फैल जाने से फसल चौपट हो गई है तो वहीं कई गांवों में भी तमसा का पानी पहुंच गया है। लोगों का कहना है कि यदि चार-पांच दिनों तक हुई बरसात की तरह पुन: बारिश हो गई तो निश्चित तौर पर शहर की सडक़ों पर तमसा का पानी बहने लगेगा और आम जनता की दुश्वारियां और बढ़ जायेगी।
राजघाट पर शवदाह करने में पर लगी रोक
आजमगढ़। एक वक्त था जब शहर के विभिन्न घाटों पर अंतिम संस्कार की कवायद की जाती थी, लेकिन बाद में प्रशासन ने राजघाट पर ही शवदाह करने का फरमान जारी कर यहां शव दाह के लिए विशेष इंतजाम भी करा दिये। वर्तमान में पूरा राजघाट तमसा के पानी में डूबा हुआ है। मंदिर के आसपास की कुछ जगह ही बची है, जहां शव दाह हो नहीं सकता है। ऐसे में अंतिम संस्कार को लेकर राजघाट पर बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। गुरूवार को तो एक शव के अंतिम संस्कार के दौरान विवाद भी खड़ा हो गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने राजघाट पर बैनर लगा कर यहां शवदाह करने पर रोक लगा दिया है। बैनर पर दाहसंस्कार के लिए शव दोहरीघाट ले जाने की अपील की गई है।
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भारद के प्रयास से बना अस्थायी शवदाह स्थल
आजमगढ़। दोहरीघाट लगभग 50 किमी दूर स्थित है। सभी की ऐसी हैसियत नहीं होती है कि वह शव को दाहसंस्कार के लिए दोहरीघाट ले जा सके। जिसे देखते हुए भारत रक्षा दल के कार्यकर्ता आगे आये है। भारद की टीम शुक्रवार की सुबह राजघाट पर पहुंची और आसपास से ईंट एकत्र कर पानी के बीच ही एक चबूतरा का निर्माण किया। जिस पर शुक्रवार को लोगों ने शवों का अंतिम संस्कार भी किया। यह अलग बात रही कि एक ही चबुतरा बना होने के चलते लोगों को राजघाट पर शव रख कर अपने नंबर का इंतजार करना पड़ रहा था।
टैंकर लगा कर की जा रही पीने के पानी की सप्लाई
आजमगढ़। तमसा के रौद्र रूप के चलते नदी तट तक मकान बना कर रहने वाले काफी परेशान है। पेयजल की समस्या ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर नपा प्रशासन ने कई जगहों पर टैंकर लगा कर पीने के पानी की सप्लाई शुरू कर दिया है। कठवा पुल से हरवंशपुर पुल के बीच नपा प्रशासन ने दो टैंकर लगाये हुए है, ताकि पानी में डूबे मडय़ा जयरामपुर के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध हो सके।

राडवेज बाईपास के पास तमसा का पानी बड़ने से घरों में जाने के लिए टयूब के सहारा लेते लोग।- फोटो : AZAMGARH

Water level of Tamsa decreased by two cm, yet the situation is terrible- फोटो : AZAMGARH

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