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एकांकी नाटकों में बसती थी भारत की आत्मा

Sun, 10 Jan 2016 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
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प्रदेश के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने कहा कि 20वीं सदी के महान नाटककार प. लक्ष्मी नारायण मिश्र के नाटक के दो  महत्वपूर्ण पहलू हैं।  पहला सांस्कृतिक और ऐतिहासिक, दूसरा पहलू सामाजिक है।
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पंडित लक्ष्मी ने पहले  तरह के नाटकों में  पुरानी लोक कथाओं को नया कलेवर देने का काम किया है। उनकी शैली भले ही आधुनिकता या पाश्चात्य रही हो मगर उनके एंकाकी नाटकों में भारत की आत्मा बसती है।

वह रविवार को नेहरु हाल में जिला एकीकरण समिति की ओर से आयोजित पं. लक्ष्मी नारायण मिश्र की 113वीं जयंती को संबोधित कर रहे थे। कहा कि पंडित लक्ष्मी नारायण मिश्र केंद्रीय हिंदू कालेज काशी से स्नातक के बाद लेखन में आ गए थे। 18 वर्ष की आयु में साहित्य सृजन में जुट गए थे।
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1925 में पहला कविता संग्रह 'अंर्तजगत तथा 1926 में पहला नाटक अशोक लिखा। 25 नाटकों और 100 एकांकियों के प्रसिद्ध महान साहित्यकार को आधुनिक नाटक सम्राट कहा जाता है क्योंकि इन्होंने आधुनिक शैली के प्रयोग में सबसे पहले हिंदुस्तानी नाटकों के लेखन क्षेत्र में किया। उनकी सबसे महत्वर्पूण विशेषता थी की उन्होंने गद्य व पद दो विधाओं में साहित्य का सृजन किया।

सिंदूर की होली उनका विश्व प्रसिद्ध नाटक माना जाता है। इलाहाबाद से आए अखिलेश सिंह ने कहा कि जनपद आजमगढ़ की धरती में बहुत बड़ी उर्वरा शक्ति छिपी है। सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने सभी का आभार प्रकट किया। अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष मीरा यादव ने की।

गोष्ठी को हरिराम सिंह, रविंद्र राय, उमेश सिद्दीकी आदि ने संबोधित किया। मौके पर डीएम सुहास एलवाई,  एसपी दिनेश चंद्र साहू, अपर आयुक्त अनिल कुमार मिश्र, एडीएम  आशुतोष कुमार द्विवेदी,  पीडी शिव कुमार पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन प्रभुनाथ पांडेय ने किया।
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