शैदा जयंती के अवसर पर शैदा साहित्य मंडल द्वारा शनिवार को नगर के कटरा स्थित एक विद्यालय में शैदा जयंती समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने कवि और आलोचक शैदा जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। युवा लेखक और रचनाकार बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि शैदा जी एक कवि के साथ-साथ आलोचक भी थे।
कामायनी की व्याख्यात्मक आलोचना, आंसू की व्याख्यात्मक आलोचना और कई अन्य पुस्तकें उनके आलोचकीय पक्ष से हमें परिचित कराती हैं। कामायनी महाकाव्य के छंदों को व्याख्यायित करते हुए जिस प्रकार से शैदा जी ने जड़वाद और सापेक्षवाद को पाश्चात्य विद्वानों जैसे डार्विन, आइंस्टीन, हेक्सले आदि का उद्घरण दिया है। वरिष्ठ साहित्यकार शशिभूषण प्रशांत ने कहा कि शैदा जी अद्भुत प्रतिभा के धनी थे।
बरवै, छंदों पर उनकी पुस्तक बरवै विलास और सूफी साहित्य के अध्येताओं के लिए तबस्सुफ एक आधार ग्रंथ है। इस मौके पर डा. हरिओम श्रीवास्तव, बजरंग सहाय आजमी, विजयेंद्र, आशिर्वाद, रामजतन, जगदीश बर्नवाल कुंद, अंबरीश आदि रहे।