तीन दिन चलने वाले इस जलसे की शुरुआत तिलावते कुरआन से हुई। जलसे का प्रथम चरण महिलाओं के इजलास से हुआ। जलसे की अध्यक्षता कर रहे मुफ्ती अब्दुल्ला फूलपुरी ने कहा कि हमारे समाज का हाल वर्तमान समय में बहुत ही बुरा है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह की इबादत और रसूल के बताए रास्ते पर चल कर ही हम सभी कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंच सकते है। सब कुछ जानते हुए भी लोगों के पास इसके लिए वक्त नहीं रहता है।
उन्होंने कहा कि औरतें ही समाज को नई दिशा और सभ्य समाज का निर्माण कर सकती है। उन्होंने औरतों को हिदायत देते हुए कहा कि अपने पड़ोस की औरतों और बच्चों को दीनी तालिम दें और इस्लाम के पैगाम को बताएं। इसके साथ ही बच्चों की परवरिश कैसे हो व उनको तालिम दिए जाने के लिए जागरुक करें।
जलसे में कारी मोहम्मद सलमान ने सामाजिक सुधार के बारे में विस्तार से बोला। मौलाना महबूब आलम ने बच्चों को शिक्षित किए जाने व उनका पालन पोषण किस तरह किया जाए के बारे में विस्तार से बताया।
मौलाना फजलुर्रहमान ने औरतों का वर्तमान और भविष्य को सवारे जाने की बात कही। जलसे में आस-पास के गांवों की महिलाए शामिल हुई थी।