आजमगढ़। फसल अवशेष प्रबंधन और पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए ग्राम पंचायतों में खुली बैठक में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान कृषि, गन्ना, उद्यान, ग्राम्य विकास, राजस्व विभाग के कार्मिकों ने किसानों को जागरूक किया।
प्रशिक्षण में कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद फसल अवशेष को जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण, फसल के मित्र कीट एवं जीवों के नष्ट होने के साथ-साथ खेत की उर्वरता एवं मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव और भूसा-चारा की होने वाली कमी के बारे में अवगत कराया गया। बताया गया कि एनजीटी द्वारा फसल अवशेष जलाए जाने पर दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। फसल अवशेष का सीटू मैनेजमेंट कृषि यंत्रों सुपर एसएमएस, मल्चर, रोटरी स्लेशर, स्ट्रा रीपर, स्ट्रा चापर, रिवर्सेबुल एमबी प्लाऊ से प्रबंधन किया जा सकता है। इन यंत्रों पर किसानों को सीधे 50 प्रतिशत अनुदान और फार्म मशीनरी बैंक एवं कस्टम हायरिंग सेंटर पर 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। भूमि संरक्षण अधिकारी संगम सिंह ने रानी की सराय में प्रशिक्षण दिया। उप कृषि निदेशक डॉ. उमेश कुमार गुप्ता ने फूलपुर में प्रशिक्षण दिया। सठियांव के विहरोजपुर में प्रधान मनोज कुमार पांडेय और ग्राम विकास अधिकारी कीर्तिका यादव ने प्रशिक्षण दिया। रानी सराय के फरिहां में ग्राम विकास अधिकारी अभिमन्यु यादव, लेखपाल राकेश पांडेय, अबू बकर, ओवैदा खां, रुक्मू खां आदि ने जानकारी दी। मेंहनगर के रोशनपुर में सहायक विकास अधिकारी कृषि की देखरेख में जानकारी दी गई।