आजमगढ़। सुबह सिहरन भी थी और आसमान में बादलों की आवागमन भी। व्रती महिलाएं प्रत्युषा (भोर) की प्रतीक्षा में सारी रात सो न सकीं। कुछ वक्त गीत में बीता और कुछ इंतजार में। 36 घंटे तक अन्न-जल के बिना लरज गई तड़के ही वेदों पर धूप-दीप और नैवेद्य सजाकर कमर तक जल में खड़ी होकर प्रतीक्षा करने लगीं पूरब के आकाश के नारंगी होने का। जैसे ह आकाश में लाल गोला दिखा नई ऊर्जा का संचार हो गया। शंख, घंटियां बजने लगीं। आरती होने लगी। अर्घ्य दिया जाने लगा।
डाला छठ के अंतिम दिन जिले भर में नदियों, सरोवरों, नहरों के तट पर सोमवार की भोर में लाखों महिलाओं ने उदीयमान भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया। उसके बाद प्रसाद ग्रहण कर पारण किया। रविवार को सूर्य के संध्या वंदन के बाद ही दीनानाथ की प्रतीक्षा शुरू हो गई थी। छठ के गीत सारी रात फिजा में गूंजते रहें। निराजल व्रतधारियों की हालत बिगड़ने लगी थी। भोर में चार बजे स्नान करके एक बार फिर धूप-दीप नैवेद्य से भरे सूप और दौरे लेकर लोग घाटों की ओर चल पड़े। कोई नदी तट पर गया तो कोई तालाबों के किनारे।
तमसा के तट पर श्रद्धालुओं का रेला लगा लग गया। जन समुद्र उमड़ा तो घाट के किनारे आध्यात्म की सरिता प्रवाहित होने लगी। गौरीशंकर, कदमघाट, भोलाघाट, पचपेड़वा घाट, सिधारी, नरौली, हरवंशपुर शाहीपुर, राजघाट पर केवल आस्था ही दिख रही थी। कमर भर पानी में व्रती महिलांए अपनी-अपनी वेदियों के सामने खड़ी हो गईं और सूर्य की उपासना करने लगीं।
सबकी निगाहें पूरब के आकाश पर टिकी थीं। पौ फटने की प्रतीक्षा हो रही थी। आदित्यनाथ देर तक बादलों की ओट लिए रहे और व्रती महिलाएं उनका मनुहार करती रहीं। आखिरकार पूरब के आकाश में लालिमा छाई और भगवान भास्कर के दर्सन हुए तो एक लाख हाथ एक साथ वंदन के लिए उठ गए। घाटों पर हर्ष प्रस्फुटित हो उठा।
सगड़ी जीयनपुर स्थित कोइरिया पोखरे, अजमतगढ़ के ताल सलोना , पूनापार अमृत सरोवर , बोझिया, कठैचा , अंजान शहीद, सगड़ी, बागखालिस, रजादेपुर, मनिकाडीह, रामगढ़ ,बांसगांव, बोझिया, कठैचा गांव के पास शारदा सहायक खंड 32 नहर की अकबरपुर माइनर में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया दिया गया।
बिंद्राबाजार राम जानकी मंदिर पर पूर्व मंत्री डा. कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा व उनके परिवार ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। गंभीरपुर बाजार के बाबा विश्वनाथ दास मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर गंभीरपुर, बिषया, बसीरहा, बेलऊ, उत्तरगांवा, कलंदरपुर, रानीपुर रजमो, दयालपुर, मोतीपुर, रीवा, गोसाई की बाजार समेत अनेक घाटों पर व्रती महिलाओं द्वारा पूजन अर्चन कर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। अहरौला में दुर्वासा धाम के तमसा और मंजूषा संगम तट, संत मौनी बाबा की कुटी गहजी और ठेकमा के शादीपुर पोखरे पर अर्घ्य दिया गया।
फूलपुर में पीपरहा घाट नदी, नागा बाबा पोखरों के घाटों पर पूरी तरह मेले जैसा दृश्य नजर आया। कुंवर नदी तट पर सूप, डलियां और पूजा सामग्री सजाकर महिलाओं ने पूजन किया।