मुबारकपुर गर्ल्स डिग्री कालेज में मंगलवार को अल्लामा इकबाल एजुकेश्नल वेल्फेयर सोसाइटी के तत्वावधान में 21वीं सदी में उर्दूभाषा की स्थिति पर उर्दू महासम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कमिश्नर बराए उर्दू भाषा भारत सरकार प्रो. अख्तरुल वासे ने कहा कि इंसान को अपने दिलों में मुल्क, मज़हब, मां और मातृभाषा इन चार चीजों को अपने दिल में रखना चाहिए।
मुबारकपुर के लोग बुनकर तो जरूर हैं लेकिन यहां का बुनकर नंगे बदन को वस्त्र देने का काम करता है। मुबारकपुर जैसे कस्बे में आकर लोगों को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल में उर्दू भाषा को दूसरी सरकारी जबान का दर्जा दिया गया लेकिन उत्तर प्रदेश उर्दू की जन्मभूमि होने के बाद यहां के लोग उर्दू भाषा को बढ़ावा देेने के प्रति जागरुक नहीं हैं।
एसपी ग्रामीण मुहम्मद इमरान ने कहा कि युवा अवस्था के लोग विशेषकर अपनी मातृभाषा उर्दू को बढ़ावा देने में पीछे न रहें। अहमद जावेद ने कहा कि उर्दू बोलने वालों की अधिकतर संख्या उत्तर प्रदेश में ही है। उत्तर प्रदेश में 2011 की जनगणना के अनुसार 9.1 प्रतिशत लोग उर्दू बोलने वाले हैं और आजमगढ़ जिले में लगभग 17 से 18 प्रतिशत लोग हैं जो उर्दू भाषा ही बोलते हैं।
अल्लामा इकबाल एजूकेशनल एंड वेल्फेयर सोसाइटी मुबारकपुर की ओर से कस्बे की निवासिनी रेशमा परवीन, शफत परवीन, उम्मेसलमा, मेहनाज फातेमा, सहित कई छात्र-छात्राओं को नगरपालिका अध्यक्ष मुबारकपुर डा. शमीम अहमद ने प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।