फर्जी एनकाउंटर, बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस हिरासत में मौतों को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। पूर्व मंत्री ने कहा कि सपा सरकार में विश्वकर्मा समाज के हित में किए गए कई फैसलों को भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया।
उन्होंने विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी, आईटीआई प्रमाणपत्र और कुटीर उद्योग के लिए पट्टा देने जैसे कार्यों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि पारंपरिक कारीगरों को मजदूर बनाए रखने के बजाय युवाओं को उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर दिए जाने चाहिए।
राम आसरे विश्वकर्मा ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में हुई 22 भर्ती परीक्षाओं में पीडीए के लिए आरक्षित 11,514 पद सामान्य वर्ग से भर दिए गए। उन्होंने इसे पीडीए वर्ग के साथ बड़ा धोखा बताया। पेपर लीक और परीक्षाएं निरस्त होने से युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर गरीब, किसान, मजदूर, नौजवान और पीडीए वर्ग के हित में काम किया जाएगा।
इस दौरान सपा जिलाध्यक्ष राम निहोर यादव, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह पटेल, परमेश्वर दयाल, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव, चौधरी यशवंत सिंह पटेल, मोहम्मद सईद कुरैशी, भरोसे सिंह पटेल, अनिल प्रधान, राजेश विश्वकर्मा, अशोक पटेल, डॉ. लोकपति सिंह पटेल, डॉ. केडी सिंह पटेल, महेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा, कन्हैया लाल आदि मौजूद रहे।