शहर के तकिया क्षेत्र में एकादशी के अवसर पर तुलसी विविह का पूजन करती श्रद्धालु महिला।संवाद
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। देवउठनी एकादशी शुक्रवार को पूरे उल्लास के साथ मनाई गई। गन्ने के मंडप तले शालिग्राम-तुलसी की पूजा अर्चना के साथ विधि विधान से विवाह हुआ। इसी के साथ वैवाहिक आयोजन सहित अन्य मांगलिक अनुष्ठान पूजा की शुरुआत हो गई है। धार्मिक परंपरा के साथ तुलसी व शालिग्राम का विवाह कराया गया। लोगों ने अपने घरों के द्वार पर रंगोली की कलाकृति भी बनाई। देवउठनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु की पूजा होती है। इसके अगले दिन भी पांच नवंबर को तुलसी विवाह का आयोजन होगा। पंडित संजय पांडेय ने बताया कि इस बार देवउठनी एकादशी पर शादी विवाह का मुहूर्त नहीं बन रहा है, क्योंकि इस दिन शुक्र अस्त रहेगा। मान्यता है कि शुक्र उदय होने पर विवाह आदि करना शुभ होता है। शुक्रतारा दो अक्टूबर को अस्त हो चुके हैं, जो 20 नवंबर को उदय होंगे। इसलिए शादी विवाह से जुड़े सारे शुभ कार्य 21 नवंबर से ही शुरू होंगे। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देव-शयन हो जाता है और फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन, चातुर्मास का समापन होता है, देव चौदस त्योहार शुरू होता है। इस एकादशी को देवउठनी कहा जाता है। वही इस दिन गन्ने की पूजा की जाती है।
ो सांत्वना पुरस्कार दिया गया। रात में सतरंगी छटा के बीच नागा बाबा का मान सरोवर नहा उठा।