जनपद के पर्यटन स्थल हर वर्ग के लिए आकर्षण के केंद्र है। जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन उद्योग को पंख लगाने के लिए पर्यटन विभाग तत्पर है। विभाग की ओर से जिले में पर्यटन विकास के लिए कई प्रस्ताव भेजे गए हैं। विभाग को शासन की स्वीकृत का इंतजार है। जिला मुख्यालय से 27 किलोमीटर दूर महराजगंज कस्बे के समीप स्थित भैरोनाथ मंदिर पौराणिकता को समेटे हुए है। मान्यता है यहां के पोखरे में स्नान करने से श्रद्धालुओं की हर मुरादें पूरी होती हैं। पूर्णमासी व मंगलवार को भव्य मेला लगता है। मंदिर गोरखपुर, मऊ, बलिया, गाजीपुर, बनारस, जौनपुर और फैजाबाद जिले के श्रद्धालु के लिए आकर्षण का केंद्र है। तमसा नदी के तट पर हुसैनाबाद में जिले की ओडीओपी ब्लैक पॉटरी को तराशा जाता है। यह क्षेत्र प्रदेश के पर्यटन के मानचित्र से दूर है। निजामाबाद कस्बा स्थित गुरुद्वारा सिख पंथ के लोगों का आस्था का केंद्र है। यहां वर्ष भर सिख श्रद्धालु गुरुमत समागम में पहुंचते हैं। लोग बताते है कि वाराणसी जाते समय सन 1505 में गुरुनानकदेव यहां रुके थे। नानकघाट पर 21 दिनों तक तप किए थे। जिले में अवंतिकापुरी धाम ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र है। लोग बताते है कि यहां पर संदीपन ऋषि का आश्रम था। जिसमें श्रीकृष्ण सुदामा के साथ पढ़ाई किए थे। तमसा व मंजूषा नदी के संगम पर दुर्वासा धाम है। यहीं पर महर्षि दुर्वासा ने 88 हजार ऋषियों के साथ हजारों वर्षों की कठोर तपस्या बाद भगवान शिव प्रकट हुए थे। इन पर्यटन स्थनों को विकसित करने के लिए शासन स्तर से प्रयास हुए।अधिकारियों की उदासीनता के चलते योजनाएं आकार नहीं ले सकी है।
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दो कराेड़ से हुआ विकास
केंद्र सरकार ने दुर्वासा धाम सहित अन्य स्थानों के विकास के लिए दो-दो करोड़ रुपये आवंटित किए थे। बजट से कुछ काम हुए कुछ अधर में रह गए। कई धामों में कार्य को ठेकेदार अधूरा छोड़ दिए हैं।
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जनपद में महत्वपूर्ण पौराणिक स्थलों पर कुछ काम कराए गए हैं। इसके अलावा शासन को पर्यटन विभाग की ओर से कई प्रस्ताव भेज गए है। शासन की हरी झंडी के बाद जिले के पर्यटन विकास को पंख लगेगा।
रुपेश कुमार गुप्ता, जिला पर्यटन सूचना अधिकारी।