लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवारा क्षेत्र हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलता है। अब तक छह गांव कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। इस समय तीन गांव कटान के मुहाने पर हैं लेकिन बाढ़ खंड की ओर से इन्हें बचाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है।
जनपद की उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी देवारावासियों के लिए किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। 1990 में उर्दिहा गांव के 325 घर घाघरा में विलीन हुए थे। इसके बाद 1990-91 में अचल नगर ग्राम पंचायत के गरीब दुबे के 20 घर घाघरा कटान की भेंट चढ़ गए। देवारा रामशरण दुबे के सात घर का अस्तित्व समाप्त हो गया। देवारा करता राम दुबे के 13 घर घाघरा में समा गए। 2005 में ठिकहिया हाजीपुर के 102 घर, धुसवां गांव के 68 घर, देवारा खास राजा के आर्मी का पूरा का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। 2016-17 में मुरली का पूरा के 40 घर, 2018 में त्रिलोकी का पूरा के 32 घर, 2019 में भीमल पटेल का पुरवा के 17 घर, बगहवा, झगरहवा बासु का पूरा, जगबली का पूरा के लगभग 95 घर कट गए। 2011-12 में चक्की गांव के 45 घर घाघरा की कटान में गुम हो गए। कटान पीड़ित घाघरा नदी के ही महुला गढ़वाल बांध व गांव के बीच में विस्थापित हुए। उर्दिहा गांव विस्थापित होकर बंधे के दक्षिण आकर बस गया। रमई का पूरा और चक्की आदि गांवों से जो लोग विस्थापित हुए, वे नई बस्ती बरडीहा, सहनूपुर, सेठाकोली आदि गांवों में बस गए। कुछ लोग गोला, गोरखपुर जाकर बस गए। कुछ ऐसे रिश्तेदारी में रह रहे हैं। वर्तमान में देवारा खास राजा के कई पुरवे, चक्की और गरीब दुबे अचल सिंह गांव कटान के मुहाने पर खड़े हैं। एक बार फिर से घाघरा का कहर शुरू होने को है अभी तक इन गांवों को कटान से बचाने का कोई प्रबंधन नहीं हुआ है।
कोट...
बंधे की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। रही बात कटान की जद में आए गांवों को बचाने की तो इसके लिए जब ऊपर से आदेश मिलेगा, तभी हम लोग इस पर काम करा सकते हैं।
- धनंजय यादव, सहायक अभियंता बाढ़ खंड।