आजमगढ़। गैर इरादतन हत्या के तीन आरोपियों को अदालत ने दोषी पाते हुए 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को 10-10 हजार रुपया अर्थदंड भी लगाया। यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश शिवचंद की अदालत ने वृहस्पतिवार को सुनाई। जब कि इसी मामले के एक अन्य आरोपी जयहिंद के नाबालिग होने के चलते उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को भेज दी गई थी।
घटना के संबंध में गंभीरपुर थाना के रामपुर गांव निवासी रघुराई पुत्र स्व.बद्री यादव ने स्थानीय थाने में पांच मई 2011 को गांव के चार लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में यह आरोप है कि घटना की सुबह लगभग 10 बजे गांव के हवलादर पुत्र हीरावन, जयहिंद, हरेंद्र पुत्रगण हवलदार यादव, मनीराम यादव पुत्री हीरावन यादव उसके घर पर चढ़ आए और उसके घर का खपरैल उजाडने लगे। जब वादी मुकदमा का लड़का लालबिहारी ने मना किया तो आरोपियों ने उसे भलाबुरा कहते बांस से मारकर गंभीर रुप से घायल कर दिया। घालायावस्था में उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस मामले में गंभीरपुर थाना पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद पांडेय और विक्रम सिंह पटेल ने इस मुकदमे के वादी रघुराई, सीमा यादव, सतीश यादव, डा.सुरेंद्र कुमार उपाध्याय, विवेचक जयहिंद भारती, डा. सिद्धार्थ शंकर, फूलचंद्र यादव, सिपाही शशिकांत त्रिपाठी को बतौर साक्षी न्यायालय में पेश किया और तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्को के सुनने के बाद हवलदार, हरेंद्र और मनीराम को दोषी पाते हुए उक्त सजा का निर्धारण किया।