12 पैमाइश के विरोध में प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : बरनाटीकर के पास हाईवे किनारे कतारों में खड़े ट्रक।
आजमगढ़। अतरौलिया क्षेत्र के लोहरा ग्रामसभा में रहने वाले लगभग 30 परिवारों के सामने अचानक बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। जिन घरों में ये लोग पिछले 70 वर्षों से रह रहे हैं, अब प्रशासन उन्हें खलिहान की भूमि पर बने अतिक्रमण बताकर खाली कराने की बात कर रहा है। इससे नाराज ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी बूढ़नपुर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने कहा कि अगर यह जमीन खलिहान थी, तो प्रशासन पिछले सात दशक तक मौन क्यों रहा, हमारे घर, सचिवालय और शौचालय भी इसी भूमि पर बने हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जिस जमीन को अब खलिहान बताया जा रहा है, वह पहले बंजर और नवीन परती भूमि के रूप में दर्ज थी।
उसी पर घर, ग्रामीण सचिवालय, सुलभ शौचालय और अन्य सरकारी निर्माण कार्य वर्षों पहले हो चुके हैं। अब अचानक पैमाइश कर बेदखली की कार्रवाई शुरू करने से लोगों में आक्रोश है। बच्चन गौड़ ने कहा कि कई घर 70–80 साल से बने हैं। हमारे दादा-पिता यहीं रहते आए हैं। अब अचानक यह खलिहान कैसे हो गया? राधेश्याम गौड़ ने भावुक होकर कहा कि हमारे पूर्वजों की मिट्टी यहां बसी है, इसे उजाड़ना अन्याय होगा। कलावती ने कहा कि यह घर मेरी मां की निशानी है, इसे गिराना मेरे जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी होगी। वहीं जहीदुल निशा ने बताया कि पति के गुजरने के बाद यही घर उनका सहारा है कि अब यह भी छिनने की नौबत आ गई है।