आजमगढ़। जिले में ऐसे कई विद्यालय हैं, जहां पर तैनात शिक्षकों की मेहनत ने यहां की तस्वीर बदल दी। गांव का परिषदीय विद्यालय जब पढ़ाई और साफ-सफाई के मामले में चमका तो लोगों को कान्वेंट स्कूल के प्रति मोह जाल भी टूटने लगा।
कॉन्वेंट से बच्चों को निकाल परिषदीय विद्यालय में दाखिला कराने लगे हैं।
हौसला और ड्यूटी के प्रति कर्तव्यनिष्ठा हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता। जिले में ऐसी ही कर्तव्यनिष्ठा निभाते हुए कई विद्यालयों के शिक्षक ने अपने सहायक शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यालय की शिक्षा और व्यवस्था की ऐसी सूरत बदली कि स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ गई।
लोगों ने प्राइवेट स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूल में बच्चों के दाखिले कराए। एडमिशन के लिए मारामारी मची तो स्कूल के बाहर नो एडमिशन तक का बोर्ड लगाना पड़ता है। स्कूलों में कई नए प्रयोग किए गए हैं।
जिन्हें बच्चे भी बड़े चाव से सीखते नजर आते हैं। इतना ही नहीं परिषदीय के बच्चे कई बड़े मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन भी कर चुके हैं।