22 महाराजा सुहेलदेव विवि में युवा तरंग कार्यक्रम के दौरान कुलपति और अतिथिगण। संवाद
चक्रपानपुर। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘युवा तरंग’ कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित दीक्षांत समारोह मैदान में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना एवं विवि के कुलगीत से हुई। इसके बाद हुनर संस्था द्वारा “होली खेलत है नंदलाल” पर नृत्य प्रस्तुति दी गई, वहीं हरिहरपुर घराने के कलाकारों ने “खेलत मसाने में होली दिगंबर” प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में मां शाकुम्भरी विवि की कुलपति प्रो. वाई विमला ने कहा कि देश को विश्व गुरु बनाने का दायित्व युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं से आत्मविश्वास और आत्मजागरण का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक के निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय ने शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज पहले देता है, फिर अपेक्षा करता है। इसलिए युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार बनना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वैशाली एवं डॉ. निधि ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रथम सत्र के समापन की घोषणा की।
स्व का जागरण कर लक्ष्य प्राप्त करें युवा : प्रो. संजीत कुमार गुप्ता-मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विवि के कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि व्यक्ति का अस्तित्व नहीं, उसकी सजीवता महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों से गुरु और प्रकृति से जुड़ने तथा स्वामी विवेकानंद के “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” मंत्र को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अपने ‘स्व’ का जागरण कर लक्ष्य प्राप्त करे, यही राष्ट्र सेवा का मार्ग है।
शिक्षक जेन-जी की मानसिकता को आसानी से परख सकता है : कुलपति-अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि शिक्षक जेन-जी की मानसिकता को आसानी से समझ सकता है और विद्यार्थियों को पठन-पाठन के साथ सांस्कृतिक, खेलकूद एवं सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि युवा तरंग के अवसर पर तीन शैक्षणिक समझौते मां शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय तथा केएनआईटी सुल्तानपुर के साथ किए जाएंगे, जिससे शैक्षणिक आदान-प्रदान को गति मिलेगी।