बरदह थाने के जिवली गांव में रविवार रात करीब पौने एक बजे पशुओं के धक्के से मंड़ई की दीवार ढह गई। बगल में सो रहे दंपती के ऊपर दीवार गिरने से उनकी मौत हो गई। एक झटके में चार बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठने से गांव में मातम है। घटना की सूचना मिलने पर एसडीएम लालगंज मौके पर पहुंचे। उन्होंने नियम के तहत प्रत्येक सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलवाने का आश्वासन दिया।
बरदह थाने के जिवली गांव निवासी रामलोचन राम (50) चार बच्चों का पिता था। आर्थिक तंगी से जूझ रहे रामलोचन को इंदिरा आवास का लाभ तो मिला, लेकिन दूसरी किस्त न मिलने की वजह से कमरे का छत नहीं बन पाया था। वह दीवारों पर सीमेंट शीट डालकर रहता था।
पक्की दीवारों वाले कमरे में बच्चे सोते थे। जबकि रामलोचन उसके बगल में ईंट की अस्थाई दीवार बनाकर उस पर मंड़ई डालकर पत्नी ज्ञानती देवी (47) के साथ सोता था। उसी में पशुओं को भी बांधता था। रविवार रात करीब पौने एक बजे अचानक पशु भड़क गए और दीवार में धक्का दे दिए।
इससे पूरी ईंट रामलोचन और उसकी पत्नी ज्ञानती के ऊपर गिर गई। ईंट से दबकर दोनों घायल हो गए। घटना के बाद बच्चों की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और ईंट हटाकर जब तक इन दोनों को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करते, रामलोचन की मौत हो गई। ज्ञानती की मौत अस्पताल ले जाने समय रास्ते में हो गई।
सोमवार की सुबह क्षेत्रीय विधायक बेचई सरोज, एसडीएम लालगंज, तहसीलदार, सीओ और थानाध्यक्ष बरदह पहुंच गए। पुलिस ने दोनों की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दी।
एसडीएम शीतला प्रसाद यादव ने बताया कि रामलोचन के नाम जमीन नहीं है लेकिन उसका श्रम विभाग में पंजीकरण होने से श्रम विभाग की तरफ से पांच लाख रुपये, मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मदद और बच्चों के नाम पट्टे की जमीन दी जाएगी।
इसके लिए वह शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए हलका लेखपाल को आदेश दे चुके हैं। रामलोचन के बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है। अन्य बच्चे रेखा, अंजली और छोटा दस वर्षीय बेटा चंदर पढ़ते हैं।