आजमगढ़। भले ही केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका योजना (वीबीजी रामजी) कर दिया हो, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्था अब भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। हालात, यह हैं कि जरूरतमंद मजदूर काम के लिए भटक रहे हैं। किसी को तीन तो किसी को 18 साल से इस योजना के तहत काम नहीं मिला है। आंकड़े बता रहे हैं कि जिले में 10 फीसदी श्रमिकों को भी 100 दिन का रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 457142 श्रमिक पंजीकृत हैं। इसमें से अभी तक महज 15987 श्रमिकों को ही काम मयस्सर हो पाया है। जिले में 441155 श्रमिकों को अभी भी काम का इंतजार है। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 451456 श्रमिकों में 154509 श्रमिकों को काम मिला, जबकि 296947 वंचित हुए। 2024-25 में 452043 श्रमिकों में 199580 को रोजगार के अवसर तो मिले पर 252463 श्रमिकों को मनरेगा रोजगार नहीं दे पाई। मनरेगा में हुए भुगतान की बात करें तो चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक 5.69 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में दो अरब, 91 करोड़ दो लाख रुपये का भुगतान किया गया। जिसमें दो अरब, 65 करोड़, 67 लाख रुपये मजदूरों में ही भुगतान किया गया। इसी प्रकार 2024-25 में कुल तीन अरब, 45 करोड़, 30 लाख रुपये में से दो अरब, 14 करोड़, 15 लाख मजदूरों को भुगतान किए गए।
100 दिन का रोजगार पाए श्रमिकों के वर्षवार आंकड़े
श्रमिकों की संख्या - वित्तीय वर्ष
9395 - 2025-26
21729 - 2024-25
12139 - 2023-24
177 जाॅबकार्ड में मात्र 77 सक्रिय
अहरौला। ब्लाक के मतलूबपुर ग्रामसभा में कुल 177 जॉबकार्ड श्रमिक पंजीकृत है, जिसमें से मात्र 77 सक्रिय हैं। मतलूबपुर गांव निवासी देवी प्रसाद पांडेय का कहना है कि उनके नाम से 2008 से जॉबकार्ड सूची में उनका नाम है, लेकिन आज तक उन्हें किसी प्रकार का ग्रामसभा में कोई काम नहीं मिला। ग्राम प्रधान सच्चिदानंद प्रेम सागर मोदनवाल का कहना है कि वह बीते साल अप्रैल में हुए उपचुनाव में विजई हुए थे। 01 साल का कार्यकाल पूरा हुआ है। इसमें उन्होंने लगभग 30 जॉबकार्ड बनवाया है, बाकी जो पहले के हैं उसमें 90 प्रतिशत निष्क्रिय रहे।
करहिनुआं 350 में से सिर्फ 125 को मिला काम
मेंहनगर। ब्लॉक के करनेहुआं ग्राम में कुल 350 जॉबकार्ड धारक परिवार हैं, लेकिन इनमें से केवल 125 ही सक्रिय श्रेणी में हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान इनको ही रोजगार मिल सका, जबकि शेष 225 जॉबकार्ड धारक योजना के लाभ से वंचित रह गए। जॉबकार्ड धारक रामनवल और देव नारायण ने बताया कि उन्हें पिछले दो वर्षों से मनरेगा के तहत कोई काम नहीं मिला है। आरोप लगाया कि कई बार ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद भी उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।
हैदरपुर में 416 में 174 को ही मिला काम
अतरौलिया। हैदरपुर ग्रामसभा में पिछले वर्ष 2025-26 में कुल 416 में से महज 174 कार्डधारकों को ही काम मिला। वहीं 2023-24 में महज 66 को ग्राम पंचायत लाभांन्वित कर पाई। हैदरपुर निवासी द्वारिका ने बताया कि नौ वर्षों से उन्हें मनरेगा के तहत कोई कार्य नहीं दिया गया। पहले कभी-कभार काम मिला था, लेकिन अब परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। उमाशंकर ने बताया कि वर्ष 2025-26 में उन्हें एक भी दिन का रोजगार नहीं मिला। वर्ष 2022-23 में 20 दिनों के लिए काम मिला था, लेकिन उसके बाद से योजना का कोई लाभ नहीं मिला।
इब्राहिमपुर में खुर्शीद को छह साल से नहीं मिले अवसर
अमिलो। सठियांव की ग्राम पंचायत इब्राहिमपुर निवासी खुर्शीद आलम ने बताया कि उसे 2015 से 2020 तक मनरेगा मजदूर के रूप में काम मिला। बताया कि उसका जॉबकार्ड अपने पास तत्कालीन प्रधान रखते थे और काम पर लगा दिया करते थे। इसके बाद छह साल का समय बीत गया, आज तक काम नहीं मिला। जब काम नहीं मिला तो मजबूरी में उसे बुनाई कर अपना और परिवार का भरण-पोषण करना पड़ा।
मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों को 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि जो श्रमिक काम की मांग करते हैं, उन्हें रोजगार के अवसर अवश्य उपलब्ध कराएं। कई वर्षों से श्रमिकों को काम नहीं मिला है, इसकी जांच कराई जाएगी।- बाबूराम त्रिपाठी, संयुक्त विकास आयुक्त।