जनपद में पिछले कुछ सालों में शापिंग माल की कई इमारतें धड़धड़ बनीं। इसके अलावा, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ कई विद्यालयों के भवन का भी निर्माण हुआ लेकिन इनकी सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया गया। बिना इसकी जांच के और अगि्नशमन विभाग से अनापति्त प्रमाणपत्र के इनके मानचित्र को आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) ने पास कर दिया। ऐसा लगता है मानो इन भवनों के लिए फायर सेफ्टी सुरक्षा का कोई महत्व ही नहीं है। भय इस बात का है कि अगर इन स्थानों पर अगलगी जैसी घटनाएं होती हैं तो जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता है।
2008 में जनपद में आजमगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। 2009 से विकास प्राधिकरण अस्तित्व में आया और शहर के विकास के संदर्भ में काम करने लगा। एडीए बनने के बाद शहर में कई ऊंची-ऊंची इमारतें बनीं। जनपद में धड़ाधड़ बन रही कुछ बिल्डिंगों में आम लोगों की आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। क्योंकि इनका निर्माण फायर विभाग से बिना अनापति प्रमाणपत्र प्राप्त किए ही कराया जा रहा है।
एक तरफ फायर स्टेशन के अधिकारी जहां नोटिस जारी करने तक सीमित है, वहीं इन बिल्डिंगों का मानचित्र पास करने के लिए जिम्मेदार विभाग आजमगढ़ विकास प्राधिकरण भी आंखें मूंदे मानचित्र पास कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्राधिकरण और फायर विभाग को लोगों की जान से कोई लेना-देना नहीं है।
विकास प्राधिकरण के कार्यों के बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है। प्राधिकरण शहर के सुंदरीकरण का कार्य भी कर सकता है, यह भी लोगों को डीएम के आने के बाद पता चला। जिस तरह हरियाली और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा कर कंक्रीट के भवन तैयार किए जा रहे हैं, ऐसे में लापरवाही समझ से परे है।
विद्यालय, अस्पताल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, होटल आदि का मानचित्र पास कराने के लिए फायर स्टेशन से अनापति्त प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है लेकिन इस अनिवार्यता को किनारे कर विकास प्राधिकरण रेवड़ी की तरह मानचित्र बांट रहा है। मुख्य अगि्नशमन अधिकारी की माने तो जनपद में कुछ को छोड़कर किसी भी अस्पताल, विद्यालय, शापिंग माल, होटल आदि के पास उनके विभाग से अनापति्त प्रमाणपत्र नहीं लिया गया है।
सूत्रों की माने तो पूर्व अग्निशमन अधिकारी ने नगर क्षेत्र की एक बिल्डिंग को अयोग्य बताया था लेकिन आज कोई कार्रवाई नहीं हुई। विल्डिंग में काम बिना किसी रोकटोक के चल रहा है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठान, होटल, स्कूल, अस्पताल आदि बनाने में फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही बिल्डिंग का मानचित्र पास किया जाता है। एक वर्ष से मैं यहां हूं, इसके पहले क्या हुआ मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं। लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो कोई शिकायत करे, मैं कार्रवाई करुंगा।
- रमाशंकर, एडीए के प्रभारी एई
जनपद में एक दो लोगों को छोड़कर किसी ने विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं लिया है। लोग एक बार हमारे पास आते हैं. जैसे ही हम फायर सुरक्षा की लिस्ट उन्हें पकड़ाते हैं, वह लापता हो जाते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी किया जाता है। कार्रवाई का काम जिलाधिकारी का है।
- सुभाष सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
जिला विकास प्राधिकरण के सचिव एडीएम प्रशासन आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि अभी मुझे जल्द ही एडीए के सचिव का प्रभार मिला है। मैं जल्द इसे दिखवाता हूं।