सरायमीर। जामिआ शरईया फैजुल उलूम शेरवां ईदगाह, सरायमीर में बृृहस्पतिवाार को तकमील-ए-हिफ्ज-ए-कुरआन करीम की एक रूहानी और अकीदतमंद तकरीब आयोजित की गई। इस अवसर पर जामिया के मोहतमिम मुफ्ती अशफाक अहमद आजमी ने कहा कि अल्लाह तआला ने इंसान को कुरआन करीम जैसी अजीम नेमत से नवाजा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत-सी आसमानी किताबें नाजिल हुईं, मगर कुरआन करीम वह एकमात्र किताब है जो अल्लाह का कलाम, अल्लाह की जबान में है। मुफ्ती अशफाक अहमद आजमी ने कहा कि चाहे दुनिया के हालात कितने ही खराब क्यों न हो जाएं, अगर मुसलमान अल्लाह की तरफ से हिफाजत चाहता है तो उसे तीन बातों पर अमल जरूर करना चाहिए। पहला, कुरआन करीम पढ़ना सीखे और रोजाना तिलावत को अपना मामूल बनाए। दूसरा, कुरआन करीम का कुछ हिस्सा जरूर याद करे। उन्होंने कहा कि जिसने पूरा कुरआन याद कर लिया, उसका दुनिया में बड़ा मकाम और मरतबा होता है। जिसके सीने में कुरआन होता है, वह उसकी रूह बनकर उसके जिस्म में समा जाता है और कुरआन की बरकत से अल्लाह तआला उसे हर प्रकार से सुरक्षित रखता है।
मुफ्ती ने कहा कि इस्लाम में हर तरह की तालीम हासिल करने की इजाजत है और हर इल्म अल्लाह की दी हुई नेमत है, लेकिन हर मुसलमान को सबसे पहले अपने बच्चों को कुरआन की तालीम देने के साथ-साथ उर्दू, दीनियात, हिंदी, अंग्रेजी और गणित की शिक्षा भी दिलानी चाहिए।
इस मौके पर मोहम्मद ताहिर की तकमील-ए-हिफ्ज-ए-कुरआन होने पर उन्हें विशेष रूप से दुआओं से नवाजा गया। कार्यक्रम में मौलाना अफजल आजमी, इमरान अहमद शेरवानी, मौलाना फैसल आजमी, जियाउद्दीन आदि उपस्थित थे।