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Azamgarh News: इमाम बारगाहों में गूंजने लगी हाय हुसैन की सदाएं

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मुहर्रम की पहली तारीख पर बृहस्पतिवार को मजलिसों का दौर शुरू हो गया। इमाम बारगाहों में हाय हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं। मजलिसों में उलेमा ने जहां शहीदाने कर्बला का जिक्र किया तो वहीं अजादारों ने नौहों और मातम से कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। जगह-जगह मजलिसों का दौर शुरू हो गया है। सरायमीर: सिरादी पूरा स्थित अज़ाखाना ज़हरा से कदीमी जुलूस बृहस्पितवार की सुबह 11 बजे परंपरागत तरीके से निकाला गया। जो रौज़ा अली आशिकान, पुराना थाना होता हुआ चौक स्थित अज़ाखाना अबु तालिब पहुंचकर संपन्न हुआ। पहली मजलिस को संबोधित करते हुए अकबरपुर से आए मौलाना शारिब अब्बास ने कहा कि इस्लाम का मतलब सलामती है। इस्लाम धर्म में ज़ुल्म ज़्यादती कत्ल व आतंक की कोई जगह नहीं है।क़ुरआन में साफ तौर पर लिखा है, कि दीन में कोई जबरदस्ती नहीं है। धर्म के नाम पर हर आदमी आजाद है। किसी को हक नहीं कि ताकत के दम पर अपना मजहब किसी से मनवाए। जिहाद के नाम पर जो आतंकी घटनाएं हो रही हैं। वह इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश है। सैय्यद जीशान अली निज़ामाबाद ने इमाम हुसैन की शहादत व उनके छोटे छोटे बच्चों पर हुए ज़ुल्म को बयान किया, तो अजादार रो पड़े। जुलूस में अन्जुमन सज्जादिया कोपागंज, अन्जुमन मोहिब्बाने हुसैन समन्दपुर , अन्जुमन मासूमिया मुबारकपुर , अन्जुमन गुलशने इस्लाम मित्तुपुर ने नौहा व मातम किया। संचालन मोहम्मद हुसैन व आदिल आज़मी ने किया। मेजवां: इमाम बारगाह में अंजुमन अब्बासिया की ओर से हुई मजलिस में मौलाना वसी मुहम्मद खां ने कहा कि आज इमाम हुसैन के नाम को हर मजहब के लोग जानते हैं। उनकी कुर्बानियों का एहतराम करता है। हुसैन की इस मजलिस के जरिए हमें दुनिया में अलग पहचान मिली है। मजलिस के बाद शुजाअत हुसैन, समर रजा, महवर और शहवर रजा ने नौहा पेश किया। दसमड़ा गांव में मजलिस को मौलाना सैयद अमीर हैदर ने खिताब किया। अंजुमन गुलजारे पंजतन ने नौहा मातम पेश किया। चमावां, फूलपुर, शाहजेरपुर, माहुल, अंबारी, कंदरी, नहरपुर, मक्खापुर, कुशलगांव, दरियापुर आदि स्थानों पर भी मजलिसें हुईं। नाैहा मातम का सिलसिला देर रात तक चला। मुबारकपुर : क्षेत्र के सभी आज़ाखानों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया है। 65 इमामबाड़ों से ताजिए और अलम का जुलूस निकलेगा। मुहर्रम की 7 तारीख़ को क़र्बला में शहीद हुए हज़रत अब्बास आलमदार की याद में अलम के जूलूस से मोहर्रम के सभी जुलूसों की शुरुआत होगी।
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